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बा विद्यालय में बेड टूटे, जमीन पर सोने को मजबूर छात्राएं

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Ba Vidyalaya: Beds broken, girls forced to sleep on the ground
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कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की स्थिति में सुधार को प्रशासनिक व बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों के प्रयास करने के बाद भी वहां सुविधाओं का टोटा है। छात्राओं को रात में सोने के लिए बेड नसीब नहीं होता है। कुछ छात्राओं को जमीन पर सोना पड़ता है। इन अव्यवस्थाओं को देखते हुए एक अभिभावक ने अपनी पुत्री का नाम कटवा लिया है और दूसरे अभिभावक ने पुत्री का नाम कटवाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया है।
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शमसाबाद बा विद्यालय में 100 छात्राएं पंजीकृत हैं। इनके सोने के लिए 36 बेड विद्यालय में हैं। इसमें से भी 18 बेड टूटे हैं, जो विश्राम करने योग्य नहीं है। इससे एक बेड पर तीन-तीन छात्राएं लेटती हैं। इसके बाद भी कुछ छात्राओं को जमीन पर लेटना पड़ता है। विद्यालय में बंदरों का भी आतंक होने से छात्राएं परेशान हैं।
विद्यालय में अव्यवस्थाएं होने से कक्षा छह की छात्रा अंशू का उसके पिता ने नाम कटवा लिया है। छात्रा लाली का नाम कटवाने को उसके पिता ने प्रार्थना पत्र दिया है। वार्डन संध्या वर्मा ने बताया कि उन्होंने अभी चार्ज लिया है। उनको विद्यालय की व्यवस्था संबंधी जानकारी नहीं है।
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क्या कहते जिम्मेदार
बीईओ बेगीश गोयल ने बताया कि बा विद्यालय में बेड टूटे हुए हैं। इसकी रिपोर्ट बीएसए को भेजी गई थी। बेड मुहैया कराने की जिला स्तर पर कार्रवाई चल रही है। एक अभिभावक ने छात्रा का काम कटवा लिया है। इसकी जानकारी नहीं है। इस संबंध में वार्डन से बात की जाएगी।
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