समाज में शिक्षा का उजियारा फैलाने के लिए साइकिल वाले गुरुजी की मुहिम रंग
लाने लगी है। देश के प्रत्येक गांव तक पहुंचने की मन में ललक लिए यह
साइकिल पर सवार होकर गांवों का भ्रमण करने निकले हैं। इनका कहना है कि वह
लखनऊ में करीब 6 हजार बच्चाें को शिक्षित कर रहे हैं और 1200 गांवों में
शिक्षा की अलख जला चुके हैं।
लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स, यूनिक बुक ऑफ
रिकार्ड्स, वंडर बुक ऑफ इंटरनेशनल रिकार्ड, मिरेकल वर्ल्ड रिकार्ड सहित देश
विदेश में नाम दर्ज करवाने वाले मोहम्मदाबाद के सलेमपुर गांव निवासी
आदित्य कुमार साइकिल पर ही स्कूल संचालित करते हैं। यह भ्रमण के दौरान मलिन
बस्तियों में कमजोर तबके के बच्चों को शिक्षा देते हैं। इन बच्चाें को
शिक्षा के जरिए मुख्य धारा से जोड़ने के लिए आदित्य ने सोमवार को साइकिल
से शहर में भ्रमण किया।
आदित्य कहते हैं कि बच्चे देश का भविष्य हैं।
झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों के शिक्षा से दूर होने से देश की
प्रगति में बाधा आ रही है। ऐसे बच्चों को नि:शुल्क बेसिक शिक्षा मुहैया
करवाना उनका लक्ष्य है। 15 जनवरी को लखनऊ के डीएम आवास से उन्होंने
साइकिल यात्रा शुरू की है। वह कहते हैं कि रोज 30 से 40 किलोमीटर साइकिल
चलाकर समाज में फैले शिक्षा के अंधियारे को मिटाने की मुहिम में लगे हैं।
यह साइकिल से दिल्ली के लिए रवाना हैं। रास्ते में यह लोगाें को बच्चाें को
शिक्षित करने के लिए प्रेरित करते हैं। यह इस बीच इन्हीें लोगाें के बीच
से पढ़े लिखे नौजवाना को स्वयं सेवक बनाकर वहां के बच्चाें को पढ़ाने की
जिम्मेदारी सौंप कर आगे बढ़ जाते हैं।
आदित्य कहते हैं कि दिल्ली
पहुंचकर वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और
नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी से मिलेंगे। रालेगण सिद्धि जाकर
अन्ना हजारे से मिलने का भी कार्यक्रम है। उन्होंने बताया कि वह लखनऊ में
झोपड़पट्टी में रहने वाले करीब 6 हजार बच्चों को शिक्षा देने का कार्य कर
रहे हैं। इस कार्य में 130 स्वयं सेवक मदद कर रहे हैं।
शहर आने के दौरान
रास्ते में रुककर आदित्य ने साइकिल पाठशाला का महत्व बताया। उन्होंने
बताया कि उनका उद्देश्य करीब 1 लाख गांवों में पहुंच कर 20 लाख बच्चाें को
अक्षर ज्ञान कराने का है। वह अभी तक लगभग 1200 गांवाें का भ्रमण कर चुके
हैं।