फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल में इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए एक वृद्ध मरीज को उसके परिजनों ने अस्पताल के बाहर सड़क पर लिटा दिया। नवाबगंज थाना क्षेत्र के बघौना गांव निवासी 70 वर्षीय राजकुमार को बुखार और सांस लेने में दिक्कत के बाद शनिवार शाम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि बिजली जाने पर वार्ड में पंखे और लाइटें बंद हो गईं, जिससे मरीज गर्मी से बेहाल थे। बाद में स्थानीय लोगों ने समझाकर वृद्ध को दोबारा इमरजेंसी में भर्ती कराया और इलाज शुरू करवाया।
राजकुमार के पुत्र सुधीर यादव ने बताया कि शनिवार शाम करीब पांच बजे उन्होंने अपने पिता को अस्पताल में भर्ती कराया था। रविवार दोपहर बाद जब वह लौटे तो पिता इमरजेंसी में नहीं मिले। काफी ढूंढने के बाद एक तीमारदार ने उन्हें बर्न यूनिट के वार्ड में बताया, जहां चार मरीज भर्ती थे। सुधीर ने आरोप लगाया कि बिजली जाते ही पंखे और लाइटें बंद हो जाती हैं, और फोम के गद्दों पर मरीज गर्मी से परेशान होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सुबह एक इंजेक्शन लगने के बाद उनके पिता को कोई दवा नहीं दी गई। पिता की बिगड़ती हालत देखकर सुधीर ने उन्हें बरामदे में लिटा दिया। इसके बाद सुधीर ने परिजनों के साथ राजकुमार को इमरजेंसी के सामने मुख्य मार्ग पर सड़क पर लिटा दिया। सड़क पर भीड़ जमा हो गई, जिसके बाद आसपास के लोगों ने हस्तक्षेप कर राजकुमार को ई-रिक्शा से दोबारा इमरजेंसी में भर्ती कराया।
वार्ड में बदहाल व्यवस्थाएं
इस घटना के बावजूद वार्ड की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। शाम साढ़े छह बजे उसी वार्ड में पेट दर्द के बाद भर्ती हुए संत बाबा राममूर्ति ने भी बदहाली बताई। उन्होंने कहा कि पूरे वार्ड में न तो कोई पंखा चल रहा था और न ही रोशनी थी। बिजली जाने के बाद पंखे बंद हो गए और अंधेरा छा गया। करीब 15 मिनट बाद जनरेटर चला, लेकिन उस वार्ड में कनेक्शन न होने के कारण स्थिति जस की तस बनी रही।
सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने बताया कि सभी वार्डों में पंखे चल रहे हैं और रात में पंखे न चलने का आरोप गलत है। डॉ. शर्मा ने स्वीकार किया कि इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए खाली वार्डों में मरीजों को भर्ती करके इलाज किया जा रहा है। लापरवाही के आरोपों पर उन्होंने कहा कि वह इसकी जांच करवाएंगे।