विसर्जन यात्रा के दौरान नृत्य करतीं महिलाएं।
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गणेश चतुर्थी महोत्सव के समापन अवसर पर चारों ओर गणपतिमय माहौल नजर आया। जिले भर में गणपति बप्पा के उद्घोष गूंजते रहे और अबीर-गुलाल ने होली की याद दिला दी। डीजे की धुनों पर भक्त थिरके। जगह-जगह मटकी फोड़ने की होड़ लगी रही। लालदरवाजा पर आलम यह रहा कि पता ही नहीं चला कि कौन किस विसर्जन यात्रा में शामिल है।
13 सितंबर को शहर भर में करीब ढाई सौ से ज्यादा गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की गई थी। पांचवें दिन से विसर्जन यात्राएं निकलना शुरू हो गईं। दस दिन तक गणेश पंडालों में रौनक छाई रही। श्रद्धालु भक्ति में रमे रहे। रविवार को गणेश चतुर्थी के समापन पर शहर में राजीव गांधी नगर, श्यामनगर, नक्कारचियान, घोड़ा नखास, बूरावाली गली, रेलवे स्टेशन फर्रुखाबाद और रेलवे रोड समेत फर्रुखाबाद और फतेहगढ़ युग्म नगरों से करीब आधा सैकड़ा से ज्यादा भगवान गणेश प्रतिमा की विसर्जन यात्राएं निकाली गईं। विसर्जन यात्राओं में डीजे की धुनों पर भक्त थिरकते चल रहे थे।
सिल्वर साइन गली और श्यामनगर आदि मोहल्लों में मटकी फोड़ने के लिए युवाओं ने जोर-आजमाइश की। युवा अबीर-गुलाल उड़ाते हुए गणपति बप्पा मोरया के उद्घोष लगाते हुए चल रहे थे। पांचाल घाट पर भगवान गणेश की मूर्तियों को भूविसर्जित किया गया।