जिले में चल रही सियासी उठापटक के बीच अनिल मिश्रा ने धमाका कर दिया है।
उन्होंने खुर्शीद परिवार से नाता तोड़ते हुए कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक
सदस्यता तक से इस्तीफा दे दिया है। इतना ही नहीं अनिल मिश्रा ने पूर्व
विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की बेगम पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद पर गंभीर
आरोप लगाए हैं। अनिल मिश्रा के इस कदम को सियासी नफा-
नुकसान से जोड़कर
देखा जा रहा है। लोग चटखारे तो यह भी ले रहे हैं कि कभी सलमान खुर्शीद के
सबसे खास सिपहसलार अनिल मिश्रा का यह कदम सत्ता सुख से भी जुड़ा है। संभव
है कि सत्ता सुख के लिए वह किसी दूसरे दल का दामन थाम सकते हैं। हरदोई
के मूल निवासी और फर्रुखाबाद में सियासी जमीन तैयार कर सलमान खुर्शीद के
खास सिपहसलार बने
अनिल मिश्रा की पहचान खाटी कांग्रेसी की है। कवि
सम्मेलनों से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रम में कभी खुर्शीद परिवार को अपना
हमदर्द बताने वाले अनिल मिश्रा का यह इस्तीफा अपने आप में कई सवाल खड़े कर
रहा है। खुर्शीद परिवार सत्ता में रहा हो अथवा विपक्ष में कम से कम
फर्रूखाबाद में तो उसका प्रतिनिधित्व अनिल मिश्रा ही करते रहे हैं।
कांग्रेस के सत्तासीन
होने पर विदेश मंत्री ने करीब 35 प्रतिनिधि बनाए,
उसमें अनिल मिश्रा का नाम सबसे ऊपर था। इतना ही नहीं डा. जाकिर हुसैन
मेमोरियल ट्रस्ट मामले में जब विदेश मंत्री पर आरोपों की बौछार हुई तो अनिल
मिश्रा ढाल की तरह नजर आए। विदेश मंत्री पर लगे आरोपों के संबंध में
मीडिया के हर सवालों का उन्होंने न सिर्फ जवाब दिया बल्कि चुनावी मैदान में
विदेश मंत्री
के पक्ष में सीना ताने खड़े नजर आए। चुनावी संचालन से लेकर
बूथ तक पर लोहा लिया। कभी खुर्शीद परिवार के लिए जान देने तक का दंभ भरने
वाले अनिल मिश्रा की ओर से अचानक सलमान खुर्शीद व उनकी पत्नी लुईस खुर्शीद
पर आरोप लगाया जाने के पीछे गहरे निहितार्थ हैं। मीडिया को जारी बयान में
उन्होंने कहा है कि 30 साल से कांग्रेस से जुड़े रहे।
लेकिन पूर्व विधायक
लुईस खुर्शीद की टोका टाकी और अनायास काम में बाधाएं डालने की वजह से
इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ खुर्शीद परिवार के प्रतिनिधि पद से
बल्कि पीसीसी सदस्य एवं कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से भी त्याग पत्र
देने का दावा किया है। अमर उजाला से बातचीत में बताया कि पूर्व विधायक लुईस
खुर्शीद के रवैये से आहत होकर
उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।
फिलहाल अनिल मिश्रा दुहाई चाहे जो दें, लेकिन जिले के सियासी फलक पर जो
चर्चाएं हैं, उसके मुताबिक इस इस्तीफे के पीछे कोई बड़ा राज है। यह राज
सियासी भी हो सकता है और व्यक्तिगत भी। हालांकि इस राज के वाबत अभी अनिल
मिश्रा कुछ भी अधिकारिक रूप से बोलने से कतरा रहे हैँ।