फर्रुखाबाद। अपना बचाव करने के लिए चालक और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) ने इमरजेंसी में रखे एंबुलेंस रजिस्टर में कानपुर ले जाए गए फर्जी मरीज का नाम चढ़ा दिया गया। अस्पताल के रिकार्ड में उस नाम का कोई मरीज नहीं है। धोखाधड़ी से नाम चढ़ाने से हड़कंप मच गया। इमरजेंसी प्रभारी ने इसे गंभीरता से लेकर सीएमएस को पत्र देकर जांच की मांग की है।
बरौन सीएचसी की 108 एंबुलेंस 18 मई की सुबह पौने 11 बजे 72378 नंबर की केस आईडी पर ओमकार नाम के मरीज को कानपुर ले गई थी। इस मरीज को लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी से रेफर दिखाया गया, जबकि अस्पताल के रिकार्ड में इस नाम का कोई मरीज न तो भर्ती हुआ और न ही रेफर।
एंबुलेंस संचालन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि चालक और ईएमटी ने अपने बचाव में लोहिया अस्पताल की ओपीडी के हाथ से बने पर्चे पर रेफर लेटर बनाकर कंपनी को भेज दिया, जबकि 2018 से लोहिया अस्पताल में ऑनलाइन पर्चे बनाए जा रहे हैं। एंबुलेंस के अफसरों ने उसी लेटर को सही मानकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। ओपीडी से बने पर्चे पर किसी भी मरीज को इमरजेंसी से ही रेफर करने का प्रावधान है।
फर्जी मरीज ले जाने की 23 मई को अमर उजाला में खबर प्रकाशित हुई, तो इमरजेंसी प्रभारी डॉ. अभिषेक चतुर्वेदी ने अपने यहां ओपीडी और भर्ती रजिस्टरों में रेफर मरीज की जांच कराई, तो ओमकार नाम का कोई मरीज नहीं मिला। यही नहीं एंबुलेंस के भर्ती और रेफर रजिस्टर में भी यह नाम नहीं चढ़ा था। 29 मई को रेफर रजिस्टर की बजाय भर्ती कराने वाले रजिस्टर पर एंबुलेंस स्टाफ ने ओमकार का नाम सबसे नीचे चढ़ा दिया।
यही नहीं जिस स्थान पर नाम चढ़ा, उससे ऊपर का मरीज भी बरौन की एंबुलेंस से लेकर जाना दर्ज है। रजिस्टर पर केस आईडी नंबर 472378 चढ़ाया गया। इमरजेंसी प्रभारी ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने सीएमएस को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने की मांग की है। बताया कि अब एंबुलेंस कर्मियों पर नजर रखी जाएगी।