धूप से बचने के लिए सिर पर दुपट्टा ओढ़कर निकलतीं किशोरियां।
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शुक्रवार को पारा तो 41.05 डिग्री सेल्सियस पर ही रहा लेकिन आसमान से मानों आग बरस पड़ी हो। सड़क पर भी लोग पसीने-पसीने नजर आए। दस बजते ही बाजारों में सन्नाटा पसर गया जो शाम पांच बजे तक बना रहा। बाहर निकले लोगों को चिलचिलाती धूप ने झुलसाकर रख दिया। सफर करने वालों का गर्मी से हाल बेहाल रहा। धूप से बचने के लिए लोग छाता और सिर पर अंगौछा आदि बांधकर निकले।
धूप केे साथ शुक्रवार को उमस भी बहुत थी। पंखे और कूलर बेकार साबित हो रहे थे। इनके सामने बैठे लोग भी पसीने से तर-बतर होते रहे। छांव में भी सुकून नहीं मिल रहा था। तापमान बढ़ने से वातावरण में उमस थी। चिलचिलाती धूप ने आग में घी डालने का काम किया।
सर्वाधिक भीड़भाड़ रहने वाले बाजारों नेहरू रोड, त्रिपोलिया चौक, घुमना बाजार, रेलवे रोड, लालसराय, लालदरवाजा, लोहाई रोड, पक्कापुल में दिन में दस बजते ही सन्नाटा पसर गया था। दुकानदार भी गर्मी से बचने के लिए कूलर और पंखों के सामने बैठे नजर आए। मगर फिर भी राहत नहीं मिल रही थी। पसीने चू रहे थे। रेलवे स्टेशन फर्रुखाबाद पर ट्रेन के इंतजार में बैठे यात्रियों का बुरा हाल था।
रोडवेज बस स्टैंड के निर्माणाधीन होने से धूप में खड़ी बसों में बैठे यात्री पसीना पोंछते नजर आए। गर्मी से बचने के लिए लोग छाता लेकर और मुंह तथा सिर में अंगौछा बांधकर घरों से निकले। बिजली की आंख-मिचौनी से भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।