सीएम अखिलेश यादव का जिले में आना आला हाकिमाें के लिए मुसीबत साबित हुआ।
एसपी के बाद डीएम की भी जिले से विदाई हो गई। जिलाधिकारी ने चार्ज लेने के
बाद अपने काम की शुरुआत लोहिया अस्पताल से की थी तो अंत भी लोहिया गांव
धनसुआ के निरीक्षण से किया। माना जा रहा है कि सपाई खेमे की गुटबाजी में
शामिल होना जिलाधिकारी के लिए अशुभ साबित हुआ।
जिलाधिकारी के रूप में
एनकेएस चौहान ने 26 मई 2014 को चार्ज लिया था। चार्ज लेते ही उन्होंने पता
किया कि जिले की सबसे बड़ी बीमारी क्या है, उन्हें फीडबैक मिला कि लोहिया
अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधार दी जाए तो आधी समस्या का समाधान अपने आप हो
जाएगा। इस पर जिलाधिकारी ने कुछ ही देर बाद लोहिया अस्पताल का निरीक्षण
किया। उन्होंने लोहिया अस्पताल का नियमित निरीक्षण करने के लिए तत्कालीन
सिटी मजिस्ट्रेट को लगाया। इससे जनता के बीच
जिलाधिकारी एनकेएस चौहान की
वाहवाही होने लगी, लेकिन समय के साथ व्यवस्था बदली और जिलाधिकारी का ध्यान
भी लोहिया अस्पताल से हट गया। डीएम के तौर पर उन्होंने लोहिया गांवों पर
विशेष ध्यान रखा। इसके बाद भी करीब छह माह से जिलाधिकारी पर सपाइयों की
गुटबाजी भारी पड़ती नजर आ रही थी। वह दोनों खेमे को संतुष्ट करने की कोशिश
कर रहे थे,
लेकिन संतुलन नहीं बना। आखिरकार एक खेमे में खुले तौर पर उनका
विरोध किया। नतीजन मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी का रूतबा छीन कर समाज कल्याण
विभाग का निदेशक बना दिया। मालूम हो कि सोमवार को अखिलेश यादव पूर्व सांसद
छोटे सिंह के बेटे सुधीर यादव के निधन पर शोक संवेदनाएं जताने आए थे। इस
दौरान सपाइयों से आला अफसरों के बारे में फीडबैक लिया था। यहां से जाते ही
एसपी के तबादले का आदेश आया और दो दिन बाद जिलाधिकारी की भी विदाई हो गई।