फर्रुखाबाद। होमगार्डों की ड्यूटी में मस्टर रोल में नोएडा में हुए खेल के बाद जिले में भी जांच का दौर चल रहा है। सभी विभागों से जहां होमगार्ड ड्यूटी करने के लिए जाते हैं, वहां से ड्यूटी के मस्टर रोल जारी किए जाते हैं। उन मस्टर रोलों की जांच करवाई जा रही है। कई मामले निकलकर सामने आ सकते हैं कि होमगार्ड ड्यूटी पर गया ही न हो और मस्टर रोल साठगांठ कर भरवा लिया हो।
जिले में इस समय 824 होमगार्ड तैनात हैं। इसमें जिलाधिकारी के कोटे में 82, कमिश्नर के कोटे में 33, जिला जज व एसपी के कोटे में 102, जिले के थानों में 327, यूपी 100 के चौपहिया वाहन में 13, यूपी 100 के दोपहिया वाहनों में 43, जिला जेल में 15, सेंट्रल जेल में 24 होमगार्ड ड्यूटी करने के लिए जा रहे हैं। 824 होमगार्ड में 639 को ड्यूटी मिल रही है। पहले होमगार्ड को 15 हजार रुपये का मानदेय मिलता था। जो अब बढ़कर 21 हजार रुपये हो गया है। इस वित्तीय वर्ष में बजट की कमी के चलते 102 होमगार्ड को ड्यूटी नहीं दी जा रही है। विभिन्न जगहों से ड्यूटी से हटाया गया है। नए वित्तीय वर्ष में बजट आने के बाद फिर से सभी को ड्यूटी पर भेजा जाएगा। जिन विभागों में होमगार्ड की ड्यूटी लगी है, वहां से ही मस्टर रोल बनकर आता है। वही विभाग होमगार्ड को अपने बजट से मानदेय का भुगतान करता है। नोएडा में मस्टर रोल में हुई घपलेबाजी के बाद जिले में भी अधिकारी सर्तक हो गए हैं। एक ओर एसपी अपने स्तर से थानों पर जांच करवा रहे हैं। वहीं, होमगार्ड विभाग की ओर से भी सभी जारी मस्टर रोल की जांच करवाई जा रही है। ड्यूटी लगाने के खेल में माहिर लोगों को अब पसीना छूट रहा है। ऑन लाइन ड्यूटी की प्रक्रिया होने के बाद भी जुगाड़ लगाकर काम करवा लिया जाता था।
चहेते होमगार्ड पांच प्रतिशत कोटे से पाते हैं ड्यूटी
शासन ने होमगार्ड की ड्यूटी लगाने में तीन प्रतिशत का कोटा होमगार्ड कमांडेंट व दो प्रतिशत का कोटा मडंल के अधिकारियों को आवंटित कर रखा है। इसमें आदेश है कि संवेदनशील स्थानों पर उन होमगार्ड की ड्यूटी लगाई जा सकती है जिनकी कार्यप्रणाली अच्छी है। साथ ही उनके चरित्र पर विभाग की ओर से कोई दाग भी नहीं लगा है। ऐसे में साहब के चहेते ड्यूटी पाने में कामयाब हो जाते हैं।
मस्टर रोल की जांच हर महीने चार स्तरों से करवाई जाती है। अवैतनिक कंपनी कमांडर की जांच के बाद वैतनिक कमांडर जांच करते हैं। इसके बाद विभाग के अधिकारी व एकाउंट के कर्मचारी जांच करते हैं। तब ही मानदेय पर स्वीकृति दी जाती है।
-शैलेंद्र प्रताप सिंह, होमगार्ड कामंडेंट