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गैरहाजिर सिपाही का वेतन निकलने में तीन पुलिस कर्मी निलंबित

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फर्रुखाबाद। साढ़े तीन वर्ष तक गैरहाजिर रहे सिपाही के वेतन निकलने के मामले में जांच रिपोर्ट मिलते ही दोषी तीन पुलिस कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। जांच में पांच सीओ, तीन आरआई समेत सहायक लेखाकार को दोषी पाया गया है। तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक प्रेमचंद्र राजपूत (वर्तमान में पीएसी हेड क्वाटर महानगर लखनऊ में लिपिक के पद पर तैनात) के खिलाफ एसपी ने मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। एसपी डा. अनिल मिश्रा ने बताया कि जांच के बाद तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। वरिष्ठ लिपिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। अन्य के खिलाफ विभागीय जांच होगी।
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जनपद कानपुर नगर थाना शिवराजपुर के गांव कपूरपुर निवासी सिपाही नरेश सिंह यादव का चार अप्रैल 2016 को पुलिस लाइन फतेहगढ़ से थाना जहानगंज तबादला हो गया था। पुलिस लाइन से रवानगी के बाद सिपाही ने थाने में आमद नहीं कराई और वह गैरहाजिर हो गया। 13 दिसंबर 2019 उसकी मौत हो गई। उसकी पत्नी सीमा ने मौत की सूचना फतेहगढ़ पुलिस लाइन के आरआई किश्वर अली को दी। साढ़े तीन वर्ष तक गैरहाजिर रहने के दौरान सिपाही का वेतन निकलता रहा। जब यह जानकारी अधिकारियों को हुई तो महकमे में हड़कंप मच गया। अमर उजाला ने यह प्रमुखता से प्रकाशित की थी इससे संज्ञान लेकर डीएम मानवेंद्र सिंह ने सीओ सिटी/लाइन मन्नी लाल गौड़ को जांच करने के निर्देश दिए थे। सीओ ने जांच रिपोर्ट में गणना के कर्मचारी, कैश पटल के कर्मचारी, चार आरआई व सहायक लेखाकार को दोषी बताकर एसपी को रिपोर्ट भेज दी थी। लेकिन जब अभियोजन अधिकारी से राय ली गई तो पर्यवेक्षण करने वाले सीओ लाइन व सीओ कार्यालय का भी शामिल होना बताया गया। कहा गया कि सीओ लाइन व सीओ कार्यालय कब्जुुल रसूल(वेतन बिल) के अवलोकन करने व हर तीन माह में लाइन के पुलिस कर्मियों की गिनती करवाते हैं। इसके चलते उनके स्तर का अधिकारी यह जांच कर ही नहीं सकता है। इससे सीओ सिटी की जांच बेकार हो गई। इस पर आईजी जोन मोहित अग्रवाल के निर्देश पर एएसपी त्रिभुवन सिंह ने मामले की जांच की। उन्होंने जांच रिपोर्ट एसपी को सौंपी। जांच में दोषी पाए जाने पर गुरुवार को एसपी ने तत्कालीन गणना मोहर्रिर कोमल सिंह, कैश पटल के एचसीपी अशोक शुक्ला, मुंशी शाहिद को निलंबित कर दिया। वरिष्ठ लिपिक प्रेम चंद्र राजपूत ने सिपाही की चरित्र पंजिका व प्रमोशन का फार्म उसके बिना आए ही भर दिया था। इससे वह भी दोषी पाए गए और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश एसपी ने दिए हैं। उनके निलंबन के लिए लखनऊ के महानगर स्थित पीएसी मुख्यालय को पत्र भेजा गया है। प्रेमचंद्र का आठ माह पूर्व यहां से पीएसी के लिए तबादला हो गया। प्रकरण में तत्कालीन आरआई राजाराम चौधरी, राकेश प्रताप सिंह, प्रदीप सिंह व पांच तत्कालीन सीओ लाइन, सीओ कार्यालय को पर्यवेक्षण में दोषी पाया गया है। इनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। सहायक कैशियर हरेंद्र सिंह चौहान ने वेतन बिना किसी अधिकारी की अनुमति के निकाल दिया था। इनके खिलाफ भी विभागीय जांच होगी।
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