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Farrukhabad News: इंजेक्शन के बहाने आशा पर खाते में 1600 रुपये डलवाने का आरोप

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फर्रुखाबाद। आवास विकास कालोनी के एक निजी अस्पताल में प्रसव के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने पर साथ में आई एक महिला (आशा कार्यकर्ता) ने लोहिया महिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती करवा दिया। शुक्रवार को आशा ने बच्चे को एक इंजेक्शन लगवाने के लिए 1600 रुपये मांगे। बच्चे के पिता ने नकद न होने की बात कही तो महिला ने पवन कुमार सिंह नाम के किसी युवक के खाते में रुपये ट्रांसफर करवा दिए।
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राजेपुर थाना क्षेत्र के गांव कड़क्का निवासी अभिषेक दुबे की पत्नी पारुल ने बृहस्पतिवार को आवास विकास के एक निजी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। अभिषेक की मां सरिता ने बताया कि बच्चे की हालत में सुधार न होने पर वहां की एक महिला (आशा) ने लोहिया अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती करवा दिया। महिला शुक्रवार को भी आई। वह एसएनसीयू के अंदर तक गई और बाहर आकर बोली कि बच्चे को 1600 रुपये का एक इंजेक्शन लगना है। उसके बताए नंबर पर पुत्र अभिषेक ने 1600 रुपये ट्रांसफर कर दिए। रुपये देने की बात जब स्टाफ को बताई तो कहा गया कि यहां कोई भी रुपये नहीं लिए जा सकते। पूरा इलाज निशुल्क होता है। शनिवार को वह महिला अस्पताल नहीं आई। ड्यूटी डॉक्टर शिवम गुप्ता ने बताया कि यहां जो लोग दबाव बनाकर बच्चों को भर्ती करवाते हैं, वही मासूमों के परिजन से रुपये वसूल लेते हैं। इससे यूनिट की बदनामी होती है। पारुल के परिजन से रुपये लेने की जानकारी मिली है। वह उच्चाधिकारियों को अवगत करवाएंगे।

2500 रुपये लिए, 2000 की मांग पूरी न होने पर नहीं दिए टीका लगवाने के कागज
फर्रुखाबाद। लोहिया महिला अस्पताल में ऑपरेशन से प्रसव होने के बाद आशा कार्यकर्ता ने 2500 रुपये ले लिए। कई बार कहने पर भी उसने बच्चे के टीकाकरण आदि का कार्ड नहीं दिया। वह 2000 रुपये और देने का दबाव बना रही है।
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शहर के मोहल्ला खटकपुरा चौकी निवासी रिजवान की पत्नी खैरुनिशां सात माह की गर्भवती थी। तबीयत खराब होने पर सास रानी बहू को लेकर दो सितंबर को लिंजीगंज अस्पताल गई। वहां मिली एक आशा कार्यकर्ता ने उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। खैरुनिशां ने तीन सितंबर को ऑपरेशन से बच्चे को जन्म दिया। रानी ने बताया कि आशा ने चार हजार रुपये मांगे। बेटा रिजवान कमाने के लिए बाहर गया था। लिहाजा रुपये नहीं थे। उन्होंने 500 रुपये उसे दे दिए। इसके बाद भी बच्चा नहीं दिया। फिर एक रिश्तेदार से लेकर 2000 रुपये दिए। बच्चे को एसएनसीयू में भर्ती करवा दिया गया। उसका अब भी इलाज चल रहा है।
रानी ने आरोप लगाया कि कई बार आशा कार्यकर्ता के पास बच्चे के टीकाकरण कराने का कार्ड बनाने और अन्य कागजात देने के लिए चक्कर लगाए, मगर उसने इन्कार कर दिया। कहा कि 2000 रुपये और दोगी, तभी आगे का काम होगा।

-सीएमएस डॉ. धीर सिंह ने बताया कि आशाओं की कई बार शिकायतें मिलती हैं। काफी प्रयास के बावजूद अंकुश नहीं लग पा रहा है। वह सीधे उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। फिर भी योजना का लाभ, टीकाकरण और अन्य कोई भी काम किसी भी प्रसूता का नहीं रुकेगा। वह इसे अपने स्तर से दिखवाएंगे।
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