फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रास्ते में जीप खराब, एंबुलेंस भी डेढ़ घंटे बाद पहुंची

विज्ञापन
विज्ञापन
मोहम्मदाबाद। मदनपुर चौकी के पास हुए हादसे ने सरकारी दावों की पोल भी खोल दी। घायलों को लेकर जा रही पुलिस की जीप बीच रास्ते खराब हो गई। लोहिया अस्पताल ले जाने के लिए जब एंबुलेंस को कॉल की गई तो पहले फोन नहीं लगा। जब किसी तरह संपर्क हुआ तो एंबुलेंस डेढ़ घंटे बाद पहुंची। आखिर में हादसे में घायल दंपती और उनकी बेटी की जान चली गई।
विज्ञापन

फाउंड्री डिपो (आगरा) की बस ने शुक्रवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे बाइक में टक्कर मार दी। हादसे में जनपद मैनपुरी के थाना कुर्रा के गांव मकियानी निवासी बाइक चालक बलराम (38), उनकी पत्नी वंदना (35), पुत्री मोहिनी (4) और पुत्र कार्तिक (2) घायल हो गए। इन्हें जब सीएचसी ले जाया जा रहा था तो पहले पुलिस की सरकारी जीप बीच रास्ते खराब हो गई।
घायलों को दूसरे वाहन से भेजने के बजाय चौकी इंचार्ज अशोक कुमार जीप को धक्का देकर स्टार्ट करने का प्रयास करते रहे। इसमें आधा घंटे का समय लग गया। यदि इस दौरान टेंपो या किसी दूसरे वाहन से घायलों को जल्द सीएचसी भेज दिया जाता तो उन्हें समय पर इलाज मिल सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सीएचसी में वंदना और मोहिनी को मृत घोषित कर दिया गया तो डॉक्टर ने बलराम को लोहिया अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
विज्ञापन

डॉक्टर ने खुद एंबुलेंस को कॉल की लेकिन फोन नहीं लगा। बड़ी मुश्किल से संपर्क हुआ तो डेढ़ घंटे बाद एंबुलेंस मदद के लिए पहुंची। लेकिन आखिर में बलराम की जान भी नहीं बचाई जा सकी। उधर, बलराम के पुत्र को उसके रिश्तेदार हालत ठीक होने पर घर ले गए थे। पर शाम को उसकी हालत बिगड़ गई। इस पर उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जिम्मेदारों ने बताया कि सीएचसी मोहम्मदाबाद में दो 108 व दो 102 सेवा की एंबुलेंस हैं। बलराम के रेफर करने के दौरान 102 सेवा की दो एंबुलेंस प्रसूताओं को उनके घर छोड़ने गई थीं। 108 सेवा की एक एंबुलेंस खराब खड़ी है और दूसरी पंक्चर हो गई थी। उसे सही कराने कर्मचारी चले गए थे।
एंबुलेंस सेवा के प्रोजेक्ट मैनेजर सौरभ कुमार सिंह ने बताया कि डेढ़ घंटे में एंबुलेंस पहुंचने की बात गलत है। जिस एंबुलेंस को भेजा गया था, वह पंक्चर हो गई थी। उस पर 102 सेवा की एंबुलेंस भी व्यस्त थीं। उनके खाली होने पर एक एंबुलेंस भेजकर मरीज को लोहिया अस्पताल लाया गया।
परिजन पहुंच गए सैफई
सीएचसी पर डॉ. सनी मिश्रा ने बलराम की हालत गंभीर देख रेफर स्लिप बना दी। इस पर हायर सेंटर/राममनोहर लोहिया अस्पताल फर्रुखाबाद लिखा था। उनका कहना था कि मरीज की हालत गंभीर है, उसे सैफई पहुंचना चाहिए, पर एंबुलेंस चालक व ईएमटी उसे हायर सेंटर सैफई नहीं ले गए।
वह बलराम को लोहिया अस्पताल लेकर पहुंचे। इस बीच परिजनों को किसी ने सूचना दे दी कि बलराम को सैफई रेफर किया जा रहा है। इससे परिजन सैफई पहुंच गए। वहां पहुंचने पर पता चला कि बलराम तो लोहिया अस्पताल में है। इस पर परिजन वहां से लोहिया अस्पताल के लिए चल दिए।
22 अप्रैल को भाई का तिलक समारोह की तैयारी में जुटा था बलराम
बलराम चार भाइयों में दूसरे नंबर का था। उसके बड़े भाई की पहले ही मौत हो चुकी है। अर्जुन और लालू उसके छोटे भाई हैं। लालू की शादी जनपद हरदोई थाना हरपाल के गांव बमरौली निवासी राजवीर सिंह की बेटी से तय हुई है।
राजवीर बलराम के सगे मामा भी हैं। 22 अप्रैल को तिलक चढ़ाने के संदर्भ में बातचीत के लिए वह तीन दिन पूर्व राजवीर के घर गया था। वहां वह अपनी ससुराल चला गया था। वहां साली की 11 मई को शादी होनी है।
वहां की तैयारी के बारे में उसने ससुरालीजनों से जानकारी की थी। लालू की बरात नौ मई को जानी है, पर बलराम सहित तीन लोगों की मौत होने से शादी कि खुशियों की जगह दोनों घरों में चीत्कार मच गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें