िशेष अदालत ईसीएक्ट की न्यायाधीश इंदू द्विवेदी ने छह साल पूर्व संदिग्ध परिस्थितियों में हुई महिला की मौत के चार आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। इस मुकदमे में विवेचना पर सवाल उठाते हुए न्यायाधीश ने महिला की मौत का कारण स्पष्ट किए जाने के लिए पुलिस अधीक्षक को मुकदमे की दोबारा विवेचना कराने का आदेश दिया है।
शहर कोतवाली के गांव सातनपुर निवासी विकास का गांव के शिवशंकर से जमीनी विवाद चल रहा था। 5 जून 2011 को विकास की पत्नी सुमन और बहन शालिनी नए मकान में नहाने गई थी। तभी पड़ोसी शिवशंकर के पुत्रों ने शालिनी को छत से धक्का मार दिया। दूसरे भाई की पत्नी रुवी ने आरोपियों को घर से भागते देखा।
जब परिवार के लोग नए मकान के मेन गेट के अंदर पहुंचे तो विकास की पत्नी सुमन का शव पड़ा हुआ था। शालिनी छत से गिरने के कारण गंभीर घायल थी। इसको अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की जानकारी जानकारी पर पुलिस मौके पर पहुंच कर पंचनामा भरा। इसमेें मृतका के गले में निशान होने की पंचनामे में जिक्र किया गया। शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
इसमें सुमन की मौत का कारण फांसी बताया गया। मृतका के पति विकास ने गांव के शिवशंकर के पुत्र भैंरो, बबलू, सल्लू और हरिवंश के खिलाफ शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें पत्नी की गला दबाकर हत्या किए जाने आरोप लगाया था। विवेचक वीरेन्द्र कुमार सिरोमणी ने जांच कर धारा 452, 323 और 304 आईपीसी के तहत अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान गवाह मृतक ननद, देवरानी रुबी ने घटना का समर्थन नहीं किया। विवेचक ने जांच में महिला की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ। अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने मेें असफल रहा। न्यायाधीश ने सुनवाई पूरी होने के बाद आरोपी भैंरो, बबलू, सल्लू और हरिवंश को मुकदमे से दोषमुक्त कर दिया। वहीं महिला सुमन की मौत का कारण जानने के लिए पुलिस अधीक्षक को घटना की दोबारा से विवेचना कराए जाने का आदेश दिया गया है।