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Farrukhabad News: शिक्षा के साथ नेताओं की नर्सरी रहे बद्रीविशाल पर भारी संकट

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फोटो-10 कॉलेज में लगी बद्रीविशाल दुबे की प्रतिमा। संवाद
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फर्रुखाबाद। वर्ष 1960 में स्थापित शहर का बद्रीविशाल महाविद्यालय आसपास के कई जिलों के छात्रों के लिए भी उच्च शिक्षा का केंद्र रहा है। छात्रों ने यहां शिक्षा के साथ ही राजनीति का ककहरा भी सीखा। नेताओं की नर्सरी रहे इस महाविद्यालय से पढ़कर निकले छात्रों ने सांसद और विधायक बनकर आम लोगों की आवाज बुलंद की। अपने गौरवशाली अतीत के समय हर साल आठ हजार छात्रों के भविष्य को संवारने वाला यह संस्थान अब 500 छात्र संख्या पर सिमट गया है।
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भोलेपुर निवासी बद्रीविशाल दुबे ने इस महाविद्यालय की स्थापना 1960 में की थी। यहां बीए में 13 विषयों की मान्यता है। परास्नातक में अंग्रेजी, भूगोल, इतिहास, हिंदी, अर्थशास्त्र, संस्कृत, समाजशास्त्र समेंत सात विषयों में पढ़ाई होती है। कानपुर विश्वविद्यालय की मेरिट सूची में स्थान बनाने में यहां के छात्र आगे रहे। विश्वविद्यालय स्तरीय प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों ने एक से बढ़कर एक प्रदर्शन से छाप छोड़ी। वर्ष 2011 में कानपुर के शिवबालक द्विवेदी प्राचार्य पद से रिटायर हुए थे, तब से काॅलेज को नियमित प्राचार्य नहीं मिला। शिक्षकों के 44 पदों में से 16 ही कार्यरत हैं। अन्य कर्मचारियों के 38 पदों में 19 ही भरे हैं। एमए के कई विषयों में छात्र संख्या दहाई तक भी नहीं पहुंच पाती।

कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी रहे छात्र संघ अध्यक्ष
- राजनीति का ककहरा सिखाने में यह कॉलेज अग्रणी माना जाता था। यहां का छात्र संघ जुझारू नेतृत्व की शानदार पाठशाला थी। कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी भी यहीं पढ़े। परास्नातक की पढ़ाई के दौरान वह 1980 में छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए। यहां अध्यक्ष के साथ अन्य पदों पर चुने जाने वाले पदाधिकारी अपने क्षेत्र में आगे बढ़े।
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नरेंद्र सिंह व सतीश दीक्षित मंत्री तो प्रांशुदत्त द्विवेदी बने एमएलसी
- नरेंद्र सिंह यादव ने यहां पढ़ाई के साथ नेतृत्व के गुर सीखे। वह छह बार विधायक बने। सपा सरकार में राज्य मंत्री भी रहे। सतीश दीक्षित भी दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रहे। यहां से पढ़ीं उर्मिला राजपूत 1991 व 1993 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से लगातार विधायक बनीं। विधानपरिषद सदस्य व भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रांशुदत्त द्विवेदी ने भी यहीं सियासत का पाठ पढ़ा। कई छात्र, ब्लाक प्रमुख व जिला पंचायत सदस्य भी बने। वर्ष 2008 तक छात्र संघ रहा। उस समय जिला पंचायत सदस्य आदित्य राठौर अध्यक्ष थे।

अटल बिहारी वाजपेयी, चंद्रशेखर, महादेवी वर्मा, कई राज्यपाल भी आए
-यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1973 में छात्रों से संवाद किया था। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर 1998 में आए। छायावादी दीपशिखा महीयसी महादेवी वर्मा सहित कई नामी साहित्यिक विभूतियों ने यहां साहित्य को गौरवान्वित किया। तत्कालीन राज्यपाल डॉ. एम चेन्ना रेड्डी, विष्णुकांत शास्त्री, अकबर अली खां भी आए। राजमाता विजय राजे सिंधिया भी आईं।

फर्रुखाबाद और कन्नौज का पहला महाविद्यालय
- कॉलेज के प्रबंधक विनोद दुबे का कहना है कि यह फर्रुखाबाद और कन्नौज का पहला महाविद्यालय था। इसीलिए इसका कोड एफबी-06 है। उन्होंने जब दायित्व संभाला तो आठ हजार विद्यार्थी थे। अब संख्या 500 रह गई है। रोजगारपरक पाठ्यक्रम में रुझान से छात्र संख्या कम होना एक कारण हो सकता है। वह कॉलेज में कॅरिअर काउंसिलिंग भी कराते हैं। हर साल रोजगार मेला लगाया जाता है। बद्रीविशाल के भतीजे बिनोद दुबे ने बताया कि बाबूजी कानपुर देहात के औन्हा शिवली के निवासी थे। वह मैनपुरी में कपड़े की दुकान पर नौकरी व कुछ ठेकेदारी कर लेते थे। फर्रुखाबाद निवासी डीआईओएस दुलारे लाल वहां जाते थे। उन्होंने फर्रुखाबाद में उच्च शिक्षा कॉलेज न होने की बात कही तो बाबूजी फर्रुखाबाद ससुराल आ गए। फिर उन्होंने कॉलेज की नींव डाली। भोलेपुर के मकान से साइकिल से पांच किलोमीटर दूर कॉलेज जाते थे। निर्माण में सीमेंट की बोरियां अपनी साइकिल से पहुंचाई। पूरी मेहनत से शिक्षा का मंदिर बनाया।
हमारे यहां मेहनती शिक्षक हैं। पुस्तकालय व अन्य सुविधाएं भी हैं। नकलविहीन परीक्षा होती है। पढ़ने वाले छात्र दाखिला लेते हैं। छात्र संख्या बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं।
डॉ. रश्मि प्रियदर्शिनी, प्रभारी प्राचार्य

फोटो-10 कॉलेज में लगी बद्रीविशाल दुबे की प्रतिमा। संवाद

फोटो-10 कॉलेज में लगी बद्रीविशाल दुबे की प्रतिमा। संवाद

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