फर्रुखाबाद। सूबे की सरकार द्वारा कुपोषित बच्चाें के लिए चलाई गई स्नेह शिविर योजना खुद ही ‘बीमार’ पड़ गई। जनवरी 2013 में शासन से योजना की गाइड लाइन तो भेज दी गई लेकिन शिविर के लिए बजट नहीं भेजा गया। इसके चलते वर्तमान में जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में 1360 बच्चे कुपोषित हैं।
स्नेह शिविर योजना के तहत कई आंगनबाड़ी केंद्राें का क्लस्टर बनाकर कुपोषित बच्चाें के लिए कार्यक्रम चलाने थे। इसके लिए बजट का भी प्रावधान किया गया था। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय ने स्नेह शिविराें के लिए जिला कार्यक्रम विभाग को चिट्ठी भेजी थी। स्नेह शिविर के आयोजन के लिए 5950 रुपया प्रति कैंप पर व्यय किया जाना था। यह कार्यक्रम सामुदायिक सहभागिता से चलना था। इस शिविर में पंचायती राज विभाग, स्वास्थ्य विभाग, स्वयंसेवी संस्थाआें, ग्राम स्वास्थ्य पोषण समिति की भी भागीदारी होनी थी। लेकिन शिविराें के लिए बजट अब तक नहीं भेजा गया। शिविर में पांच साल तक के बच्चाें को शामिल किया जाना था। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय के निदेशक आनंद कु मार सिंह ने कुपोषित बच्चाें की रिपोर्ट भी जिले से तलब की थी। इसे भेज भी दिया गया था लेकिन अब तक बजट का इंतजार चल रहा है।
स्नेह शिविराें में ये होने थे इंतजाम
- कुपोषित बच्चाें का चयन आंगनबाड़ी कें द्रों पर बच्चाें के वजन के मानक पर किया जाएगा।
- देहात इलाकों में 3 से 4 आंगनबाड़ी केंद्रों के क्लस्टर बनेंगे। इन पर 20 से 25 बच्चाें के समूहाें में वर्ष में कम से कम 6 शिविराें का आयोजन किया जाएगा।
- स्नेह शिविराें का संचालन आईसीडीएस मिशन से चुनी अतिरिक्त आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां करेंगी।
- शिविर में 12 दिन लगातार आने वाले 6 माह से ऊपर के बच्चाें को ताजा भोजन दिया जाएगा। इनके खाने में 300 से 400 कै लोरी व 18 ग्राम प्रोटीन की मात्रा रहेगी।
- डीवार्मिंग व आईएफए की गोलियाें का वितरण किया जाएगा।
- खाने में सब्जियाें, अंडाें, सोयाबीन, गुड़, चीनी का उपयोग किया जाएगा।
- स्नेह शिविर में पहले व आखिरी दिन बच्चाें का वजन लिया जाएगा।
1360 बच्चे कुपोषित
जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर 1360 बच्चे कुपोषित हैं। इन केंद्रों पर 244175 बच्चे पंजीकृत हैं। 6 माह तक के 340 व इससे ऊपर के 1020 बच्चे कुपोषित हैं।
बजट नहीं मिला
आंगनबाड़ी केंद्रों के क्लस्टर बनाकर स्नेह शिविराें का आयोजन होना था। शासन से गाइड लाइन आई थी लेकिन बजट नहीं मिला। इससे योजना आगे नहीं बढ़ पाई।
मनीष चौरसिया, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी