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नहीं मिली राहत, आलू बुवाई में आफत

Mon, 06 Oct 2014 05:31 AM IST
Farrukhabad
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फर्रुखाबाद। जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। किसानाें को अभी तक राहत कोई नहीं मिली है। इससे आलू बुवाई का खर्च उठाने में इन्हें मुश्किल हो रही है। बुवाई के लिए आढ़तियाें के भरोसे हैं किसान। महंगाई बढ़ने से एक बीघे में बुवाई का खर्च एक साल में तीन हजार रुपये बढ़ गया है। इस बार यह खर्च 10 हजार रुपये प्रति बीघा पहुंच गया है। यह बात अलग है कि बंपर निकासी और किसानों के पास पैसे का संकट होने से बीज के दामाें में भी गिरावट हुई है। अभी तक 30 से 40 फीसदी बुवाई ही हो पाई है।
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पुखराज व 3797 प्रजातियों के दाम पांच दिनों में 200 रुपये प्रति क्विंटल गिर गए हैं। पुखराज का बीज 2500 से 2800 रुपये और 3797 बीज के दाम 2200 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल हैं। किसान लागत कम करने के लिए छट्टा (मीडियम साइज) बोने की तैयारी में हैं। पुखराज छट्टा बीज 1200 से 1250 रुपये व 3797 प्रजाति 1100 से 1150 रुपये में है।
सूखा के चलते किसानों के पास पैसे का संकट है । किसान क्रेडिट कार्ड के लिए बैंकें चक्कर लगवा रही हैं। लोन का पुराना पैसा यह जमा नहीं कर पाए हैं। समितियां क्रेडिट पर खाद देती हैं। यहां खाद की किल्लत है। बाजार में खाद के लिए नगद पैसा नहीं है। बीज के साथ खाद, सिंचाई व ढुलाई महंगी हुई है। ऐसे में ब्याज पर पैसे लेकर बुवाई करने की मजबूरी बन रही है। आढ़तियों से भी पैसा उधार लिया जा रहा है। किसानाें का इनका कहना है कि सूखा राहत में बीज, खाद व डीजल पर सब्सिडी देनी चाहिए।
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किसानाें के बोल
7 बीघा खेत है। क्रेडिट कार्ड के लिए शुकरुल्लापुर आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के चक्कर लगा रहा हूं। यहां से टरकाया जा रहा है। सूखा राहत के तहत सरकार मदद करें। इस बार ब्याज पर पैसा लेकर बुवाई करनी पड़ेगी।
श्याम सिंह किसान, महमदपुर

10 बीघा खेती है। सूखा से खरीफ की फसल में कोई फायदा नहीं हुआ। पैसे का संकट है। ब्याज पर पैसे की जुगाड़ कर रहे हैं।
संतोष कुमार किसान , हमीरपुर

इस बार आलू की बुवाई पर संकट है। सूखा से बजट बिगड़ा हुआ है। सरकार से सूखा राहत में मदद की उम्मीद थी। यह पूरी होती नहीं लग रही है। बुवाई मुश्किल होने लगी लगी है।
राजीव कुमार किसान , रायपुर

बुवाई अब, मदद कब
आलू आढ़ती एसोशिएसन के अध्यक्ष सतीश वर्मा का कहना है कि जिला सूखाग्रस्त घोषित है। आलू बुवाई चल रही है। सरकार से किसानाें को कोई मदद नहीं मिल रही है। खाद, डीजल व बीज पर सब्सिडी मिलनी चाहिए। ऐसा न होने पर बुवाई के रकवा पर असर पड़ सकता है।
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