फर्रुखाबाद। बेमौसम बरसात ने आलू की कीमतों को दागी कर दिया है। गुणवत्ता खराब होने से गैर प्रंातों ने नो इंट्री कर दी है। अब यह आलू सूबे की मंडियों में ही खप रहा है। आलू की नमी बढ़ी होने से किसान इस आलू को शीतगृहाें में भी रखने से हिचकिचा रहे हैं। सातनपुर मंडी में इन दिनाें 12 हजार क्विंटल आलू की आमद हो रही है।
फर्रुखाबादी आलू के लिए बिहार, आसाम, पश्चिम बंगाल, दिल्ली व उत्तराखंड की मंडियां मुफीद हैं। 40 से 50 फीसदी आलू की खपत इन्हीं प्रांताें में होती हैै। कोहरे से फसल झुलसा की चपेट में आ गई है। इसके बाद हुई बरसात से आलू में दाग लग गया है। नमी दूर न होने से इस आलू को गैर प्रांतों में ले जाना भी समस्या है। इससे आलू के दाम ठहर गए हैं। भाव 500 से 600 रुपये क्विंटल पर रुक गए हैं।
कारोबारी आलू को आजमगढ़, जौनपुर, पीलीभीत, बरेली, पूरनपुर की मंडियों में बिक्री के लिए ले जा रहे हैं। उत्तराखंड में मांग खत्म तो नहीं हुई, इसमें कमी जरूर आई है। 2000 क्विंटल के करीब आलू इस प्रांत में बिक्री के लिए जा रहा है। क्वालिटी खराब होने के साथ आलू की नमी से किसान इसे शीतगृहाें में भंडारित करने से भी डर रहे हैं।
आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश वर्मा का कहना है कि आलू की खराब हुई गुणवत्ता से दामाें में उछाल नहीं आ रहा है। किसानाें को पिछले साल से ज्यादा भाव मिल रहे हैं।
इनसेट
2013 के भाव (क्विंटल में )
तारीख भाव
4 फरवरी 425 रुपये
5 फरवरी 451 रुपये
6 फरवरी 461 रुपये
7 फरवरी 455 रुपये
8 फरवरी 435 रुपये
2014 के भाव (क्विंटल में )
4 फरवरी 501 रुपये
5 फरवरी 501 रुपये
6 फरवरी 651 रुपये
7 फरवरी 575 रुपये
8 फरवरी 510 रुपये