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गड्ढे में डूबा युवक, मौत

Sun, 05 Jan 2014 05:46 AM IST
Farrukhabad
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मोहम्मदाबाद। गड्ढे में डूबने से छात्र की मौत हो गई। जेसीबी से कांटा डालकर करीब ढाई घंटे बाद शव बाहर निकाला गया। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इस पर पुलिस ने पंचायतनामा भर शव सौंप दिया।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव गंगानगर रोहिला निवासी कपिल कुमार उर्फ सोनू यादव (22) पुत्र स्व. राकेश कुमार शनिवार को मोहम्मदाबाद हवाई पट्टी के पास बने हनुमान मंदिर में परिवारी रामगोपाल के बेटे कल्लू (7) के साथ प्रसाद चढ़ाने गया था। इसके बाद करीब 11.30 बजे कपिल मंदिर से कुछ दूर एक गड्ढे के पास शौच के लिए चला गया। इस दौरान पैर फिसलने से कपिल गड्ढे में जा गिरा। कल्लू ने भागकर घर जाकर इसकी सूचना दी। परिजन व अन्य ग्रामीण पुलिस को सूचना देकर घटनास्थल पर पहुंचे। चाचा सुधीर और रामगोपाल आदि ने गड्ढे में काफी देर तक कपिल की तलाश की लेकिन वह नहीं मिला। इस दौरान कोतवाल रामनरायन भी फोर्स के साथ पहुंच गए।जेसीबी मंगवाई गई। दोपहर करीब 2 बजे जेसीबी में कांटा फंसाकर कपिल का शव बाहर निकाला गया। शव देखते ही कपिल की बहनें मोनिका और निकिता दहाड़े मारकर रोने लगीं। चाचा सुधीर और बाबा जगदीश सिंह के कहने पर पुलिस ने बगैर पोस्टमार्टम कराए शव परिजनों को सौंप दिया। बाबा ने बताया कि कपिल की गड्ढे में डूबकर मौत हुई है।

मां-बाप के बाद सिर से उठा भाई का भी साया
मोहम्मदाबाद। कोतवाली क्षेत्र के गांव गंगानगर रोहिला निवासी कपिल यादव घर का इकलौता चिराग था। मां और बाप की मौत के बाद दो बहनों की सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर ही थी। काल के क्रूर हाथों ने बहनों के सिर से भाई का भी साया छीन लिया। कपिल के बाबा अवधेश यादव के मुताबिक उनके पुत्र राकेश कुमार की करीब 15 साल पहले मौत हो गई थी। तीन-चार साल बाद कपिल की मां सुशीला देवी की भी मौत हो गई। इसके बाद प्रपौत्र कपिल और प्रपौत्री मोनिका व निकिता का उन्होंने पालन-पोषण किया। कपिल ने बीएससी के बाद बहनों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी। वह अक्सर कहता था कि बहनों की धूमधाम से शादी करेगा। लेकिन होनी को शायद और कुछ मंजूर था। भाई का शव देख बहन निकिता और मोनिका कई बार रोते-रोते बेहोश हुईं। बहनों व बाबा का करुण क्रंदन देख हर किसी की आंख भर आई।
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स्कूल में पढ़ाकर करता था गुजारा
कपिल कसबा स्थित अरविंद स्मारक पब्लिक स्कूल में पढ़ाता था। स्कूल से मिलने वाली पगार से वह घर का खर्चा भी चलाता था। वह बहनों को खूब पढ़ाना चाहता था। यह कहना था कपिल के चाचा सुधीर यादव का।
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