शान से मनाया फर्रुखाबाद का 300वां स्थापना दिवस
फर्रुखाबाद। नवाब मोहम्मद खां बंगश सोसायटी की ओर से फर्रुखाबाद का 300वां स्थापना दिवस शान से मनाया गया। इस दौरान गंगा-जमुनी तहजीब का नजारा दिखाई दिया। वक्ताओं ने कहा कि वतन की हिफाजत में बंगश नवाबों की कुर्बानियोें भुलाया नहीं जा सकता।
सोसायटी अध्यक्ष नवाब काजिम अली बंगश के संयोजन में हयात बाग के मकबरे में फर्रुखाबाद के स्थापना दिवस पर सियासी व समाजी तंजीमों से जुड़े प्रमुख लोगों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि डा. कैसर खां ने शहर के इतिहास और उसकी बसावत नक्शा खींचा। उन्होंने कहा कि 27 दिसंबर की तारीख शहर के इतिहास का सुनहरा दिन रहा है। अध्यक्षता कर रहे जिला पंचायत अध्यक्ष तहसीन सिद्दीकी ने कहा कि फर्रुखाबाद में तमाम पुरातत्व महत्व के स्मारक हैं। इनको संरक्षित कर और सुंदरीकरण होने से आगरा और राजस्थान की तर्ज पर पर्यटन स्थल बनाए जा सकते हैं, जिससे सरकार को विदेशी मुद्रा अर्जित होगी। सोसायटी संरक्षक डा. अनवार खां ने कहा कि देश की हिफाजत के लिए बंगश खानदान के तीन भाई फांसी पर झूल गए। उनकी कुर्बानी को भुलाना नाइंसाफी कही जाएगी। दरगाह अहसनी के प्रबंधक मकसूद अहमद मियां ने कहा कि बंगश के मकबरे की उपेक्षा ठीक नहीं है। इसको संरक्षित करने के लिए सभी को आगे आना होगा। डा. जेपी सिंह ने फर्रुखाबाद के इतिहास और संरचना, बर्बाद हो चुके दरवाजे और शहर पनाहों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डा. संतोष प्रजापति ने कहा कि फर्रुखाबाद की गंगा-जमुनी तहजीब मिसाली रही है। अफजल हुसैन ने कहा कि स्मारकों का संरक्षण न किया गया तो इनका वजूद समाप्त हो जाएगा। मोहम्मद युनूस अंसारी ने स्थापना दिवस के जश्न में प्रशासनिक अफसरों के भाग न लिए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की। समीर अहमद ने कहा कि बुजुर्गों के स्मारक से हमें भूला हुआ सबक याद होता है। डा. मोहम्मद मोहसिन ने फर्रुखाबाद के इतिहास पर प्रकाश डाला और मकबरे तक सड़क निर्माण करवाए जाने की मांग की। बिलाल शफीकी ने शेर पढ़ा- तेरा किरदार तवारीख में ताविंदा है, बानिये शहर तेरा नाम अभी जिंदा है। इसके अलावा शायर महमूद अली महमूद ने भी कलाम सुनाया। हाजी मुजफ्फर रहमानी, मौलाना एजाज नूरी, मौलाना सदाकत हुसैन, आमिल खां और कनीज फात्मा ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर मसीह उल्लाह, नवी शेर खां, जावेद अनवर बंगश, मतलूब, इमरान खां, पूर्व सभासद राजनराय जौली राजपूत, इस्लाम अली, सुलेमान खां, इकबाल हुसैन, शारिक अली, आशू खां, मोहम्मद हसीन, फरहत हसीन और मुस्लिम रईस आदि मौजूद रहे।
कई शख्सियतें सम्मानित
फर्रुखाबाद। सोसायटी की ओर से अमर उजाला समेत कई प्रमुख शख्सियतों को सम्मानित किया गया। वेलफेयर कमेटी के जलसे में वक्ताओं ने शहर के इतिहास प्रकाशन अभियान की ‘अमर उजाला’ की मंच से सराहना की। कहा कि ‘अमर उजाला’ समाचार पत्र ने खबरों के साथ इतिहास की जानकारी दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। तमाम वक्ताओं ने यहां तक कहा कि उन्हें शहर के कई गूढ़ रहस्य अमर उजाला के जरिए जानने का अवसर मिला। इस दौरान अमर उजाला के साथ ही डा. रामकृष्ण राजपूत, डा. कैसर खां के योगदान की भी तारीफ हुई। समाजसेवियों को शाल उढ़ाकर सम्मानित किया गया। अमर उजाला में प्रकाशित त्रिपोलिया चौक के फोटो भी बांटे गए।
अस्पताल का नाम मोहम्मद खां बंगश हो
फर्रुखाबाद। स्थापना दिवस के जलसे में लिंजीगंज अस्पताल का नाम मोहम्मद खां बंगश रखने की आवाज उठी। सपा नेता आकिल खां ने कहा कि शासन अस्पताल का नाम मोहम्मद खां बंगश रखा जाना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने अभिलेखों में बंगश के मकबरे को दर्ज करने और रास्ते में अतिक्रमण हटवाए जाने की मांग की।
कुरानख्वानी के साथ चढ़ाई गई चादर
फर्रुखाबाद। वेलफेयर सोसाइटी के संयोजन में बंगश के मकबरे पर सुबह कुरआन ख्वानी का आयोजन किया गया। इसमें लोगों ने कुरआन की तिलावत की और चादर चढ़ाकर फातिहा पढ़ी। दूसरी तरफ फर्रुखाबाद महोत्सव समिति अध्यक्ष डा. रामकृष्ण राजपूत, पप्पन मियां, गुरुवचन सिंह, अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, बाबू सिंह गिल ने 300वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया और इमारतों की मरम्मत की पुरातत्व विभाग से मांग की।