फर्रुखाबाद। डाक्टर जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से मरहूम खुर्शीद आलम खां की याद में मुशायरा की महफिल सजाई गई। मुशायरे में किसी शायर ने महबूबा की बेवफाई बयां की तो किसी ने गर्त में जाती सियासत पर चोट किया। मुशायरे में मौजूद भीड़ के जोश के सामने ठंड और कोहरा भी बेबस नजर आया।
बजरिया फील्ड में रविवार देर रात सजी मुशायरे की महफिल में विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने देश के नामचीन शायरों को सम्मानित किया।
डा. वसीम बरेलवी ने शेर सुनाया- आप नाराज हो, रूठे खफा हो जाएं, बात इतनी भी न बिगड़े की जुदा हो जाएं। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कलाम सुनाया- क्या हुआ दामिनी तुम्हारी जान को, किस तरह पूरा करें तुम्हारे अरमान को। माजिद देवबंदी ने कलाम सुनाया- आका के मदीने की हर चीज मिसाली है, जर्रे भी निराले हैं मिट्टी भी निराली है। इकबाल अशहर ने कलाम सुनाया- अमीरे शहर घर में बड़ा उजाला है, न जाने कौन सा तूफान आने वाला है। डा. नसीम निकहत ने- अमीरों के लिए सारी रिवायत हर इनायत है, गरीबों के तो सियासत निवाले भी छीन लेती है कलाम सुनाया।
रईस अंसारी ने कलाम पेश करते हुए कहा कि- मुमकिन है कभी ढूढने आ जाए वो मुझको, मैने इसी उम्मीद पर घर नहीं बदला।
अज्म शाकरी ने कलाम पेश किया- बेखबर चांद सितारों को खबर करती है, जब कोई आह खिलाओं में सफर करती है। सरदार चरन सिंह बशर, सुनील तंज और शबीना अदीब, बेकल उत्साही, रईस अंसारी और कलीम कैसर ने भी कलाम सुनाए। मुशायरे का संचालन प्रो. अनवर जलालपुरी ने किया। इस अवसर पर अनिल मिश्रा, प्रदीप राठौर, आफताब हुसैन, दिलदार हुसैन, शुजातउल्लाह, मुईद अफ्रीदी, लाडले खां, जीतू मिश्रा, वाहिद अली, फरीद चुगताई, सरदार मीर खां, नसीम और महबूब खां आदि मौजूद रहे।