फर्रुखाबाद। पंजाब नेशनल बैंक की मुख्य शाखा से फर्जी हस्ताक्षर कर निकाले गए 21.10 लाख रुपये के मामले में स्वाट टीम को दूसरे दिन भी कोई खास क्लू हाथ नहीं लगा। स्वाट टीम प्रभारी ने बैंककर्मियों से भी पूछताछ की। स्वाट टीम प्रभारी ने बैंक में लगे सीसीटीवी कैमरे की हार्डडिस्क भी सीज कर दी है।
गौरतलब है कि रेलवे रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक की मुख्य शाखा से गुरुवार को फर्जी हस्ताक्षर कर अज्ञात जालसाजों ने तीन चेकों के माध्यम से 21.10 लाख रुपये निकाल लिए थे। शुक्रवार को दूसरे दिन स्वाट टीम प्रभारी बैंक पहुंचे। उन्होंने मैनेजर आरके सिंह से गुप्त पूछताछ भी की। इसके अलावा कैशियर और एक अन्य कर्मचारी से भी जानकारी ली। स्वाट टीम ने हर बिंदु पर गहनता से जांच पड़ताल की। सीसीटीवी कैमरे के फुटेज भी देखे लेकिन कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी। स्वाट टीम प्रभारी ने सीसीटीवी कैमरे की हार्डडिस्क भी सीज कर दी है। नोएडा से सीसीटीवी कैमरे की फुटेज दिखाने के लिए आए इंजीनियर मनोज कुमार ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे की हार्डडिस्क कई दिनों से खराब पड़ी है। बंद होने से पहले तक का हार्डडिस्क में डाटा रिकार्ड होगा। हार्डडिस्क चेक करने पर ही पता चलेगा कि कब से बंद पड़ी है।
फर्जी चेकों के जरिये 21.10 लाख रुपये उड़ाने की रिपोर्ट बैंक मैनेजर आरके सिंह ने शहर कोतवाली में दर्ज करा दी है। जिन खातों से इतनी बड़ी धनराशि का भुगतान किया गया। उन खातों में पर्याप्त धन नहीं था। चेकें खाता धारक के नाम सेल्फ भुगतान के रूप में लगाई गईं।
रिपोर्ट में कहा है कि ग्राहक सुरेश कुमार सिंगल के खाता संख्या 2863000100170477 की सेल्फ चेक संख्या 475695 से 7.50 लाख रुपये, राम किशोर खाता संख्या 0169000400280237 की चेक संख्या 839575 से 5.80 लाख एवं तीसरी चेक प्रदीप कुमार की खाता संख्या 0169000409004539 चेक संख्या 551962 से 7.80 लाख रुपये का फर्जी तरीके से भुगतान ले लिया है। इन चेकों को सक्षम अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से रोकड़िया बीके शुक्ला के पास जमा कर भुगतान ले लिया गया।
इसके बाद कैशियर के पास भुगतान को चौथी चेक खाता संख्या 1934002100114873 की चेक संख्या 757954 से 7.00 लाख रुपये भुगतान की चेक लगाई गई। पांचवीं चेक खाता संख्या 193400010016067 से 6,30,363 रुपये भुगतान के लिए लगाई गई। चौथी एवं पांचवी दोनों सेल्फ चेकों पर नाम प्रदीप कुमार लिखा था और पिछले पृष्ठ पर रोहित नाम लिखा था। इस पर शक होने पर मामला पकड़ में आया। इन चेकों पर भुगतान के लिए सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर भी फर्जी थे। बैंक मैनेजर की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी। बैंक मैनेजर ने बताया कि जिन चेकों के माध्यम से 21.10 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। वे खाता धारक के नाम सेल्फ चेकें थीं। इन खातों में पर्याप्त धन नहीं था। इसमें खाता संचालन तक ही रकम है। अब इस बात की पड़ताल की जा रही हैं कि ये चेकें संबंधित खाता धारकों के बजाय जालसाजों तक कैसे पहुंची। सीओ सिटी वाईपी सिंह ने बताया कि बैंक कर्मचरियों से पूछताछ के बाद खाता धारकों से पूछताछ की जाएगी।
क्या कहते हैं बैंक के जिम्मेदार
- फर्जी चेक से धन निकल जाने की रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। अब जांच करना पुलिस का कार्य है। - आरके सिंह बैंक मैनेजर
- जिन चेकों को भुगतान हुआ है। वे पास होने के लिए नहीं आई थी। वह फर्जी हस्ताक्षरों से पास की गई। - दिनेश चंद्र, चेक पास अधिकारी
- कंप्यूटर चलाना नहीं जानता हूं। सक्षम अधिकारी से पास होने और टोकन आने के बाद भुगतान करता हूं। - बीके शुक्ला हेड कैशियर
- जिस समय फर्जी चेकों से भुगतान किया गया। उससे पहले बैंक मैनेजर ने डाकघर कार्य को भेज दिया था। इसलिए वे चेक पास कराने अधिकारी के पास नहीं गई थी।- रजनी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
- रजनी के अनुपस्थिति में वह कार्य नहीं करता हैं। वह दफ्तारी का कार्य देखता है। जिन फर्जी चेकों से भुगतान हुआ। उन चेकों को लेकर पास कराने को अधिकारी के पास नहीं गया था।- अशोक कुमार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
चीफ मैनेजर ने खंगाले रिकार्ड
फर्रुखाबाद। पीएनबी बैंक की मुख्य शाखा से फर्जी चेकों से 21.10 लाख रुपये का भुगतान होने की जानकारी पर आगरा से चीफ मैनेजर की टीम ने डेरा डाल दिया है। उन्होंने बैंक के अभिलेखों को खंगाला। बैंक ने जिन-जिन चेकों का भुगतान किया, उनके खातों के अभिलेख चेक किए। फिलहाल चीफ मैनेजर ने इस संबंध में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
बैंक से जुड़ा है शातिर मास्टर माइंड
फर्रुखाबाद। फर्जी चेकों से 21.10 लाख रुपये उड़ाने वाले मास्टर माइंड की बैंक से जुड़े होने की संभावना जताई जा रही है। इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले मास्टर माइंड को बैंक के सभी कर्मचारियों के कार्याें की जानकारी है। बैंक में 20 हजार रुपये तक की सेल्फ चेक का भुगतान करने की क्षमता हेड कैशियर को है। इसके बाद पांच लाख रुपये तक की चेक पास करने का अधिकार पिंटू गुप्ता को दिया गया है, जबकि पांच लाख से अधिक की धनराशि की सेल्फ चेक पास करने का अधिकार आफीसर दिनेश चंद्र के पास है। मास्टर माइंड को इसकी जानकारी थी। यही वजह है कि उसने चेकों पर दिनेश चंद्र के हस्ताक्षर बनाए।
टोकन गायब की नई कहानी
रिपोर्ट की खातिर रुकी रही जीडी
फर्रुखाबाद। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि कई टोकन भी गायब हैं। रात करीब 11 बजे के बाद मैनेजर ने तहरीर दी। शुक्रवार प्रात: काल पुलिस ने रुकी जीडी पर रिपोर्ट अंकित की। तहरीर में चेकों को उल्लेख किया गया, लेकिन बैंक से पांच टोकन गायब होने का उल्लेख नहीं किया गया। इसकी जानकारी शुक्रवार को पुलिस को दी गई। बैंक मैनेजर आरके सिंह ने बताया कि बैंक से पांच टोकन भी गायब है।
चपरासी को सौंपी कैश की जिम्मेदारी
फर्रुखाबाद। पीएनबी बैंक के हेड कैशियर पद पर तैनात वीके शुक्ला से शुक्रवार को कार्य नहीं लिया गया। उनके स्थान पर बैंक मैनेजर ने चपरासी सुनील को कैश काउंटर पर बैठाया।