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पांव में थकन, भीगे नयन, राह सूनी पर गुनगुनाते चलो

Mon, 31 Dec 2012 05:30 AM IST
Farrukhabad
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पूरे साल हर पहल का साक्षी बना रहा ‘अमर उजाला’
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साल 2012 विदा हो रहा है। नववर्ष के आगमन का सहस्त्र स्वागत है। बीतते साल 2012 ने कई उतार-चढ़ाव आए। ‘अमर उजाला’ भी इसका गवाह रहा। बीते साल के समूचे घटनाक्रम पर ‘अमर उजाला’ ने पैनी नजर रखी। जोश सच का.... बरकरार रखते हुए पत्रकारिता की सीमाओं और मर्यादा का भी पूरा ध्यान रखा। तमाम समस्याओं के निस्तारण में जनता और प्रशासन के बीच सेतु का काम किया। बीतते साल 2012 में फर्रुखाबाद जिले में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए। इन सभी घटनाओं को ‘अमर उजाला’ ने वरीयता के आधार पर प्रकाशित किया। ‘अमर उजाला’ टीम के लिए छपने वाली हर खबर महत्वपूर्ण रही। खबर की प्रासंगिकता के हिसाब से उसे स्थान मिला, लेकिन फर्रुखाबाद जिले के पाठक ‘अमर उजाला’ की खबरों को किस वरीयता क्रम में आंकलन हैं, इसे भी जानने की कोशिश की गई। ‘अमर उजाला’ ने करीब सौ पाठकों के बीच एक सर्वे किया। सर्वे के दौरान पाठकों से पूछा गया कि ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित कौन सी खबर उनके दिल को छू गई? किस खबर ने पाठकों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया? पाठकों की पसंद के अनुरूप ‘अमर उजाला’ में सालभर छपी खबरों का मूल्यांकन किया। इस दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसे पाठकों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।
दिल को छूने वाली पांच खबरें
अमर उजाला संकल्प
नवरात्र में अमर उजाला की ओर नौ दिन अलग-अलग मुद्दों पर संकल्प दिलाया गया। किसी दिन पानी बचाने के लिए तो कभी बेटियों की सुरक्षा के लिए। किसी दिन नशाखोरी के खिलाफ तो किसी दिन सच बोलने के लिए संकल्प दिलाया जाए। नौ दिन तक चले ‘अमर उजाला संकल्प’ को पाठकों के दिलों को छू गया। सर्वे में तमाम पाठकों ने इसे पहले स्थान पर रखा।
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आंखों से छलकता है खामोशी का दर्द
शहर के स्कूलों के आसपास शोहदों को खड़े होने से छात्राओं को आ रही दिक्कतों के बारे में प्रकाशित खबरें भी पाठकों की पसंद रही। खबरें छपने के बाद स्कूलों के आसपास पुलिस तैनात हुई। छात्राओं को शोहदों से मुक्ति मिली।
बस हौसले की जरूरत
विश्व एड्स दिवस पर प्रकाशित खबर भी पाठकों की पसंद में शामिल है। इस खबर में बताया कि किस तरह से इन दिनों शादी के पहले वर एवं वधु का एड्स जांच से संबंधित प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। एड्स पॉजीटिव के साथ किस तरह से समाज के कुछ लोग जुड़े हुए हैं। एड्स से बचाव, जिले में एड्स पॉजीटिव की संख्या आदि पर आधारित मुकम्मल खबर प्रकाशित की गई।
दावा बेमानी- कहीं खान नहीं तो कहीं मनमानी
अमर उजाला ने किसानों को दर्द को बयां करते हुए सहकारी साधन समितियों की मनमानी को उजागर किया। जिले की एक-एक समिति के बारे में विस्तार से खबर प्रकाशित कर अफसरों को नींद से जगाया। इस खबर के छपने के बाद समितियों में खाद की व्यवस्था दुरुस्त हुई। किसानों को राहत मिली। इस खबर को भी पाठकों ने खूब पसंद किया।
खुद आमदनी करें तो किसी के मोहताज नहीं होंगे
नगर पालिका प्रशासन किस तरह से अपनी आर्थिक स्थित में सुधार कर सकता है इस बावत अमर उजाला ने कई रास्ते सुझाए। खबरों में बताया कि कहां-कहां टैक्स लगाकर अपनी माली हालत सुधार सकती है। खबर छपने के बाद पालिका प्रशासन सक्रिय हुआ और उस दिशा में पहल शुरू हो गई है।
कारोबार से जुड़े पांच कदम
टूट रहीं टेक्सटाइल पार्क की सांसें
शहर में वस्त्र छपाई उद्योग 1875 से शुरू हुआ। पहले आलू के ब्लाक फिर लकड़ी ब्लाक से होता हुआ स्क्रीन प्रिंटिंग तक पहुंचा। दुनियां के 15 देशों में रजाई, टाई, स्टोल, स्कार्फ जाते हैं। यह कारोबार पांच साल में 100 करोड़ से 500 करोड़ सालाना तक पहुंचा। तकनीकी व संसाधनाें के लिए टेक्सटाइल पार्क की जरूरत है। पार्क के बाद कारोबार 5000 करोड़ सालाना का हो सकता है। इस मुद्दे पर व्यापारियों की ओर से किए जा रहे प्रयास में ‘अमर उजाला’ कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ा नजर आया।
आलू किसानों की किस्मत पर अंधेरा
पिछले पांच सालों से प्रति बीघा नुकसानी बढ़ रही है। पुरानी व ताजा फसल में 3000 रुपए प्रति बीघा की चोट लगी है। असम के बाजार भी नहीं उबार पाए हैं। वहां गई रैकें घाटा खाकर लौटीं। 65 हजार किसानों पर 90 करोड़ का कर्ज चढ़ा है। अगैती आलू के दाम 500 के आसपास झूल रहे हैं। आलू किसानों के दर्द को अमर उजाला समय-समय पर खबरें प्रकाशित कर उजागर करता रहा है।
जरदोजी के अड्डों पर खटती जिंदगियां
शहर में जरदोजी कारोबार 50 साल पुराना है। 200 इकाइयां इस काम में लगी हैं। 40 हजार हुनरमंद इस करोबार में खट रहे हैं। जरी के लंहगे, शाल,साड़ी व दुपट्टे, शूट कई देशों को निर्यात होते हैं। सालाना 60 करोड़ का टर्नओवर है। कारीगरों को बाजिव मेहनताना नहीं मिल रहा है। न्यूनतम मजदूरी अधिनियम केे तहत मेहनताना इस साल भी नहंी मिल पाया। मजदूरों की समस्या को अमर उजाला ने उठाया। तमाम समस्याओं का निस्तारण हुआ। फिर भी अभी बहुत कुछ करने को बाकी है।
वेंटीलेटर पर खादी आंदोलन
फर्रुखाबाद व कन्नौज में श्रेत्रीय श्री गांधी खादी आश्रम16 केंद्र हैें। 2010 के बाद हालात बिगड़े । खादी आयोग ने रूई देना बंद कर दिया। 50 गांवों की 10 हजार कत्तिनें खाली हाथ हो गईं। आश्रम ने 1 करोड़ 14 लाख का लोन ले लिया। इस पर ब्याज चल रहा है। कमाई बंद है। दिसंबर 2011 में 33 कर्मचारियों ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु मांगी थी। इनके वेतन का पांच लाख बकाया है। फंड भी नहीं मिला। 10 साल पहले संस्था का ढाई करोड़ सालना का टर्न ओवर था। अमर उजाला की ओर से किश्त-दर किश्त खबरें प्रकाशित की गई तो प्रशासन ने सुध ली। आयोग के आला अफसरों ने फर्रुखाबाद आकर कर्मचारी का दर्द जाना। वेतन भुगतान का भरोसा दिया है।
निर्माण सामग्री बिक्री को 5 करोड़ की चपत
जिले में बालू का ठेका न होेने से निर्माण सामग्री बिक्री का कारोबार खासा प्रभावित हुआ। सरिया, मौरंग, ईंट, सीमेंट बिक्री करने वाले कारोबारियाें को 5 करोड़ का नुकसान हुआ है। घर बनाने का सपना अधूरा बना रहा। ठेका न होने की वजह से किस तरह से अवैध बालू खनन का कारोबार चला, इसे भी अमर उजाला ने खबर प्रकाशित कर बताया। खबरें छपने के बाद प्रशासन ने छापेमारी शुरू की। अवैध खनन करने वाले तमाम लोग पकड़े गए।
मझधार में डंवाडोल होती रही सियासत
दो ब्लाक प्रमुख धड़ाम
सत्तासीन होते ही सपा ने ताकत दिखाई। बसपा कब्जे वाली ब्लाक प्रमुख की दो सीटें धड़ाम हो गईं। मोहम्मदाबाद में प्रमुख अमर कुमारी यादव व बढ़पुर ब्लाक के प्रमुख अखिलेश कटियार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया। अब 4 जनवरी को इन विकास खंडों पर नए प्रमुख का चुनाव होगा। ब्लाक प्रमुख पद की सियासी हलचल को अमर उजाला ने वरीयता के आधार पर प्रकाशित किया।
चुनाव चक्रव्यूह के सात दांव
विधानसभा चुनाव में ‘अमर उजाला’ ने चक्र व्यूह के आखिरी सात दांव शीर्षक से खबर प्रकाशित किया। इस खबर के छपने के बाद चुनाव मैनेजरों की रणनीति में फेरबदल करना पड़ गया था। यह दांव मुरैया दांव, आतिशी दांव, खुशराना दांव, रागिनी दांव, गुलाटी दांव, संकटा दांव व अंगद दांव थे।
दिल लुभाने वालों ने रूलाया
फरवरी में विधानसभा चुनावों के दौरान बालीवुड व खेल सितारों का जमावड़ा जुटा। इन दिल लुभाने वालों की झलक पाने वालाें ने रुलाया भी। संजय दत्त, राजबब्बर के चाहने वालाें की भीड़ पर पुलिस की लाठियां चलीं। कायमगंज में अजरूद्दीन की सभा में मंच ढहा। इसमें कई घायल हुए। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगा।
केजरी का आना और आप
डा. जाकिर हुसैन ट्रस्ट में विकलांगों क ो उपकरण वितरण में घपले आरापों ने देश की सियासत को गर्माए रखा। पहली नवंबर को अरविंद केजरीवाल की सभा में पूरे देश से आईएसी कार्यकर्ता जुटे। दिसंबर महीने के आखिरी में आप का गठन हो गया।
नरेंद्र सिंह को मंत्री का ओहदा
विधानसभा चुनाव के बाद सपा ने जिले की तीन विधानसभा सीटों को कब्जा लिया। अमृतपुर से विधायक नरेंद्र सिंह यादव को सूबे की सरकार में व्यावसायिक शिक्षा व होमगार्ड राज्यमंत्री का दर्जा मिला। इससे विकास को रफ्तार मिल रही है।
शहर की पांच प्रमुख समस्याएं
पानी रे पानी...
शहर पालिका में 21072 पानी के कनेक्शनधारक हैं। 2000 के करीब हैंडपंप लगे हैं। पेयजल आपूर्ति के लिए 44 नलकूप और 9 ओवरहेड टैंक हैं। क्लोरीन डोजर 20 जगह ही हैं। इसके बाद भी पेयजल संकट बरकरार है। कई घरों को पानी आज भी नसीब नहीं हो रहा है। जल निगम की फर्रुखाबाद पेयजल योजना अभी तक अंतिम चरण में भी नहीं पहुंच पाई है।
जलभराव ने रुलाया आगे भी नौबत
जुलाई में जलभराव से तलैया फजल इमाम, कछियाना, छावनी, कादरी गेट, गंगानगर, नरकसा, रेटगंज, खटकपुरा में हजारों लोग घर में फंस गए थे। हैंडपंप नाले के पानी में आधे डूब गए थे । जेसीबी मशीन लगाकर चोक नाले खोले गए। नालों पर अतिक्रमण अभी भी है। प्रशासन ने कार्रवाई के लिए पालिका से नालों के अतिक्रमणकारियों की सूची मांगी थी। यह नहीं दी गई। अगले साल बरसात में समस्या मुंह खोलकर खड़ी हो जाएगी।
तकनीकी पचड़े में सीवर लाइन
फर्रुखाबाद सीवरेज योजना लटकी है। स्टीमेट शासन की मेज तक नहीं पहुंच पाया। मई महीने में जल निगम ने प्रस्ताव बनाया था। फर्रुखाबाद व फतेहगढ़ में 400 करोड़ से 160 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन पड़नी है। यह सारी गलियों से गुजरेगी। दोनों शहरों में एक एक ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाना है। दो मुख्य पंपिग स्टेशन व दो इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। 2लाख 76 हजार की आबादी को फायदा मिलना है। प्रस्ताव की खामियाें से योजना परवान नहीं चढ़ रही। इस माह में काम शुरू होना था।
जाम क ा सालता दर्द
जाम की मुश्किल है कि कट नहीं रही। बात चाहे चौकी की हो, लालदरवाजा, कादरीगेट, नेकपुर पुल की, समस्या शहरियों को तकलीफ दे रही है। लालदरवाजे से टाउनहाल तक पहुंचने में तमाम दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। पिकेट फेल होती रही है। सिलसिला जारी ही है।
गली, नुक्कड़ों पर मौत का दावतनामा
बिजली विभाग ने जगह जगह शहर में मौत के सामान रख छोडे़ हैं। ट्रांसफार्मरों की बेरीकेडिंग नहीं हैं। ट्रांसफार्मर जर्जर हालत में हैं। तार सालाें से बदले नहीं गए। यह अक्सर टूट जाते हैं। सड़कों पर पोल लगे हैं। बिजली विभाग जाती साल भी राहत के इंतजाम नहीं कर पाया है।
शहर के पांच प्रमुख आयोजन और आंदोलन
साध समाज का धार्मिक महाकुंभ
मार्च के महीने में साध समाज का धार्मिक महाकुंभ भंडारा शहर में आयोजित हुआ। यहां दिल्ली, कलकत्ता, तमिलनाडु, गोवा, सूरत, राजस्थान, बंगलौर व हरियाणा से समाज के लोेगों ने भागीदारी की। यह आयोजन सात दिन चला।
200 साल से जल रही अखंड ज्योति
जोगराज स्ट्रीट के जैन मंदिर में 200 साल पहले जलाई गई अखंड ज्योति आज भी रोशन है। यह 24 वें तीर्थंकर महावीर दिगंबर का मंदिर है। मंदिर में मूर्ति स्थापना के समय पारंपरिक मान्यताओं के मुताबिक ज्योति जलाई गई थी।
राम नगरिया मेले में आस्था का सैलाब
माघ पूर्णिमा से शुरू होकर पूरे माह तक चलने वाला राम नगरिया मेला शहर का प्रमुख मेला होता है। इस मेले में जिले के अलावा आसपास के तमाम जिलों के लोग शामिल होते हैं। कुछ लोग तो पूरे माह रुक कल्पवास करते हैं।
रामचंद्र मिशन में विदेशी भक्त
रामचंद्र मिशन के सालाना आयोजन में फतेहगढ़ में समाधि पर मत्था टेकने के लिए भारत के कोने कोने से उनके अनुयायी पहुंचे। इसमें विदेशों के उनके अनुयायी भी शामिल थे। सूफी संत की समाधि पर दो दिन चलने वाले आयोजन में शांति की तलाश में मेला लगा रहा।
आईएसी और सर्वोदय मंडल का सत्यागृह
आईएसी और सर्वोदय मंडल ने जनसमस्याओं को लेकर कई आंदोलन किए। इनमें कलेक्ट्रेट परिसर में सत्यागृह खास रहा। प्रशासन को आंदोलनकारियों की बात माननी पड़ी थी।
हमारे गौरव
जमीं से आसमां तलक
मोहम्मदाबाद के मूल निवासी और हिमाचल प्रदेश के आईजी रह चुके भरत सिंह यादव के खाते में कई उपलब्धियां हैं। वह नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। भरत सिंह यादव आठ फरवरी को 101 साल के हो जाएंगे। 1938 में टेरीटोरियल आर्मी में भर्ती होने वाले भरत सिंह 1848 में ब्रिटिश आर्मी से भारतीय पुलिस सेवा में आए। वह राजस्थान, उत्तर प्रदेश के कई जिलों के पुलिस कप्तान रहे। डाकू उन्मूलन अभियान में भी इनका योगदान रहा। 1974 में हिमाचल प्रदेश आईजी पद से सेवानिवृत्त हुए।
लेफ्टिनेंट बन मान बढ़ाया
फतेहगढ़ स्थित दुर्गा कालोनी निवासी पूर्व सैनिक विनोद सिंह भदौरिया के बेटे शिवपरम सिंह भदौरिया ने लेफ्टिनेंट का तमगा हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया। वर्ष 2008 में एनडीए प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर लेफ्टिनेंट पद के लिए चयनित शिवपरम ने बतौर जेंटलमैन कैडेट विभिन्न स्थानों पर प्रशिक्षण लिया। चार साल की ट्रेनिंग के बाद इंडियन मिलिट्री एकेदमी देहरादून में लेफ्टिनेंट का तमगा हासिल किया।
साल की शुरूआत दुष्कर्म कर हत्या से हुई
साल की शुरुआत में ही शहर के रामलीला गड्डा में एक बालिका से दुराचार के बाद उसकी हत्या कर दी गई। 22 जनवरी को हुई इस हृदयविदारत घटना को लोग अभी भी भूल नहीं पाए हैं। 6 वर्षीय बालिका को लकड़ी की ठेकी पर काम करने वाले कन्नौज जिले के तंात्रिक बहादुर जाटव उर्फ राजू ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर उसका शव बढ़पुर के प्रेमचंद्र के खेत में फेंक दिया था। शहर की घटना होने के कारण पुलिस ने कुछ दिनों तक आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिशें दी। साल खत्म हो रहा है, लेकिन अभी तक पुलिस आरोपी का पता नहीं लगा पाई।
प्रेम की कीमत दुष्कर्म
जनवरी में ही कायमगंज के गांव चौखड़िया की रहनी वाली एक लड़की की शादी शहर कोतवाली के मोहल्ला कछियाना में हुई थी, लेकिन इस लड़की का प्रेम प्रसंग उसके गांव के ही एक युवक से चल रहा था। लड़की को उसका प्रेमी ले गया। इस बात से गुस्साए लड़की के परिवार के लोग प्रेमी के घर पर धावा बोल दिए। असलहों से लैस होकर इन लोगों ने प्रेमी की भाभी को उठा ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। इस घटना को लेकर भी दो गुटों के बीच काफी दिनों तक तनाव की स्थिति बनी रही थी। यह घटना भी काफी चर्चित रही थी। हालांकि बाद में पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली थी और आरोपियों की गिरफ्तारी की थी।
दलित का सिर मुड़वा कर घुमाया गया
शहर के गांव नगला बजीर में 13 फरवरी को एक दलित युवक को दबंगों ने खेत से बैगान चोरी का आरोप लगा कर उसके साथ मारपीट करने के बाद उसका सिर मुडवा दिया और पूरे गांव में घुमाया था। लेकिन इस मामले की घटना से पूरे प्रशासन को घेरे में खड़ा कर दिया गया था। हालांकि मामले की पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी की थी।
दोहरे हत्याकांड के हत्यारों को नही खोज पाई पुलिस
अमृतपुर तहसील से करीब एक किलोमीटर दूर खेतों में कायमगंज के इजौर निवासी अनिल बाथम और उसका साढू हुकुम सिंह बाइक से बारात में शमिल होने के लिए शाहजहांपुर के कांठ में बाइक से जा रहे थे। यह लोग अमृतपुर से होकर जा रहे थे। इसी दौरान हत्यारों ने दोनों को रोक लिया और हत्या करने के बाद खेतों में फेंक दिया था। दोहरे हत्याकांड की खबर पर पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे और कई बिदुंओं पर जांच की लेकिन अभी तक इस मामले में पुलिस के पास कोई ठोस जानकारी नही मिली है। पुलिस अभी तक यह नही पता लगा पाई कि आखिर इन लोगों की हत्या किस लिए और क्यों की गई है।
इस साल पहली घटना हुई बलि के लिए
साल भर में शहर के सबसे चर्चित रमन हत्याकांड रहा। गांव गढ़िया ढिलावल निवासी रामप्रकाश का 6 वर्षीय बेटा रमन को 26 नबंवर की शाम उठा लिया गया था। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई पता नही चला। अखिर में उसका शव 1 दिसंबर को उसका शव बघार नाला में मिला था। ग्रामीणों के आक्रोश के आगे खोजी कुत्ता ने खोजबीन की और कुत्ता गांव सींगनपुर में किशनपाल के घर में जा घुसा था। इसके बाद आक्रोशित लोगों ने किशनपाल के घर पर धावा बोल कर तोड़फोड़ की थी। पुलिस को काफी होशियारी ने किशनपाल और उसके बेटे को थाने पर लाया गया। कई दिनों तक फोर्स तैनात रही। हालांकि पुलिस ने खुलासा करते हुए तीन को जेल भेज दिया। पुलिस का कहना कि रमन की हत्या बलि के लिए हुई थी।
एक राइफल की हो रही खोजबीन
गुजरात ड्यूटी के बाद एक स्पेशल ट्रेन सशस्त्र सुरक्षा बल को लेकर फर्रुखाबाद से होकर लखनऊ के लिए जा रही थी। इस दौरान ट्रेन में मौजूद जवान रत्नकर और सूर्य कुमार ने चोरी की नियत से आधुनिक असलहों को चलती ट्रेन से फेंकना शुरू कर दिया था। हालांकि इस मामले की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जांच के बाद पुलिस ने तीन इनसास, एक कार्बाइन को बरामद कर लिया। इसके साथ ही दोनों का चालान कर जेल भेज दिया गया। जीआरपी एक इनसास की बरामदगी के लिए खोजबीन कर रही है। अभी तक उसका कोई भी सुराग नही लगा।
चर्चित रहा कटैला प्रकरण, नही लौटे प्रेमी युगल
थाना अमृतपुर क्षेत्र के गांव खाकिन निवासी एक युवती को पड़ोसी गांव कटैला निवासी एक युवक 30 मई को कथा सुनने के दौरान भगा ले गया था। इस घटना के बाद लड़की पक्ष के सैकड़ों लोगों 31 मई की रात कटैला गांव में धावा बोलकर कई घरों में तोड़फोड़ की थी। इस घटना के बाद कटैला गांव के सैकड़ों ग्रामीण डर की वजह से पलायन कर गए थे। इस घटना के बाद राज्य मंत्री नरेंद्र सिंह यादव भी गांव पहुंचे थे। उन्होंने पीड़ितों को आश्वासन दिया था कि वह लोग वापस लौट आएं, लेकनि प्रेमी युगल आज तक नहीं लौटे।
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रेल बजट में में मिली दो ट्रेनें
रेल बजट में केंद्र सरकार ने फर्रुखाबाद जिले को भी सौगात दी। इसमें कामाख्या एक्सप्रेस और अहमदाबाद गोरखपुर एक्सप्रेस को जिले के लिए दिया। इन ट्रेनों के चलने से यह की जनता के साथ ही व्यापारियों को भी राहत महसूस हुई। व्यापारियो ने इससे पहले कई बार चौरीचौरा को फर्रुखाबाद तक लाने के लिए प्रयास किया लेकिन अभी तक यह यह ट्रेन नही बढ़ी।

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