फर्रुखाबाद। जिले में अनुसूचित जाति के निर्बल तबके क ो रोजगार मुहैया कराया जाएगा। इनके लिए कुक्कुट पालन की योजना लागू की गई है। इसके तहत 625 इकाइयाें की स्थापना की जानी है। इस योजना पर पूरा अनुदान दिया जाएगा।
शासन ने पहले चरण में कुक्कुट पालन योजना सूबे के 25 जिलों में शुरू की है। इसमें फर्रुखाबाद को भी शामिल किया गया है। पशुपालन विभाग केे निदेशक ने योजना को अमली जामा पहनाने के लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को फरमान जारी किया है। यह योजना केवल अनुसूचित जाति के निर्बल वर्ग के लोगों के लिए ही है। चयन के बाद इन्हें पशु चिकित्सालय में एक सप्ताह का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन्हें चूजों के पालन पोषण, आहार, बीमारियों के रोकथाम, टीकाकरण व अंडा, मांस के विपणन की जानकारी दी जाएगी। इस पर प्रति लाभार्थी 200 रुपए खर्च होगा। इस धनराशि से इन्हें स्टेशनरी व प्रमाणपत्र दिया जाना है। दवाओं की आपूर्ति मुख्यालय से की जाएगी। लाभार्थियों को चूजे, दवा, छप्पर की व्यवस्था, यातायात पर व्यय एवं प्रशिक्षण पर पूरी तरह अनुदान है। लाभार्थी स्वीकृृत धनराशि का उपयोग कुक्कुट पालन में ही कर सकेंगे। इसके लिए पशु चिकित्साधिकारी को निरीक्षण व पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। धनराशि का व्यय दूसरे कार्य मेें करने पर कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे होगा लाभार्थियों का चयन
कुक्कुट पालन के लिए लाभार्थियों की चयन सूची ग्राम प्रधान तैयार करेंगे। इसका परीक्षण इलाकाई पशु चिकित्साधिकारी व खंड विकास अधिकारी करेंगे। सूची को अंतिम रूप देने के लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में दो सदस्यीय टीम बनेगी। इसमें डीपीआरओ व मुख्य पशु अधिकारी रहेंगे। योजना में शामिल होने के लिए लाभार्थी के रहने की व्यवस्था होना जरूरी है।
एक चक्र में 14 लाख अंडों का होगा उत्पादन
सूबे में सालाना 365 करोड़ अंडों व 10 करोड़ चूजों का आयात किया जाता है। इससे भारी राजस्व बाहर चला जाता है। सरकार ने प्रदेश राजस्व की बचत व कुक्कुट विकास कार्यक्रमों क ो स्वावलंबी बनाने के लिए यह योजना तैयार की है। जिले में 625 इकाइयों के गठन से 31250 चूजों से एक चक्र मेें 14 लाख अंडाें व 210 कुं तल मांस की प्राप्ति होगी। इसमें एक चक्र में 10 फीसदी चूजों की मृत्यु दर भी शामिल है।