सिंचाई विभाग में करीब 85 लाख रुपये का घोटाला सामने आया है। मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने जांच कमेटी का गठन किया है। डीएम के आदेश पर वरिष्ठ कोषाधिकारी ने टीम के साथ सिंचाई विभाग में अभिलेखों की जांच शुरू कर दी है। टीम को अभिलेखों में कई अनियमितताएं मिली हैं। कुछ अभिलेख जांच टीम को कर्मचारी मुहैया नहीं करा सके।
सिंचाई विभाग में वर्ष 2017-18 में कई मदों में करीब 85 लाख रुपये के घोटाले की शिकायत शासन को भेजी गई थी। लेखन सामग्री मद में करीब तीन लाख 50 हजार की खरीदारी की गई। इसका रजिस्टर में लेखा जोखा नहीं मिला। अधिकारी और लिपिक की मिली भगत से लेखन सामग्री में गबन मिला। इसी से स्टाक और वितरण रजिस्टर नहीं बनाया गया। वर्ष 2017-18 में 5 लाख 25 हजार रुपये का फर्नीचर खरीदा गया। यह भी नहीं मिला। गाड़ियों के अनुरक्षण मद में करीब 3.40 लाख रुपये का गबन हुआ।
व्यवसायिक सेवाएं मद में करीब 5.30 लाख, कंप्यूटर मद में करीब 2.50 लाख, चिकित्सा प्रतिपूर्ति भत्ता मद में करीब 34.87 लाख रुपये का गबन किए जाने की शिकायत मुख्यमंत्री को भेजी गई थी। वर्ष 2017-18 में विभाग की ओर से बिजली बिल का करीब 9 लाख रुपये भुगतान होना दिखाया गया। इसकी हकीकत बिजली विभाग के बिल और जमा धन का विवरण लेने पर उजागर होगी। घोटाले का मामला शासन तक पहुंचने पर जिलाधिकारी मोनिका रानी ने वरिष्ठ कोषाधिकारी अतुल तिवारी और जिला विकास अधिकारी को जांच सौंपी है। वरिष्ठ कोषाधिकारी और जिला विकास अधिकारी ने शुक्रवार को टीम के साथ दोपहर बाद सिंचाई विभाग के कार्यालय में पहुंचकर अभिलेख मांगे।
एक्सईएन सिंचाई सुशील कुमार के कार्यालय में न होने से कर्मचारियों ने आधे अधूरे अभिलेख जांच टीम को दिए। इस पर वरिष्ठ कोषाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने जांच के लिए सभी मदों के रजिस्टर तलब किए हैं। वरिष्ठ कोषाधिकारी अतुल तिवारी ने बताया कि करीब 85 लाख घोटाले की शिकायत हुई है। जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। जांच पूरी होने पर आख्या जिलाधिकारी को दी जाएगी।