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चार साल कोर्ट में लड़ाई लड़ एक दिन नौकरी कर हो गए सेवानिवृत

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चार साल कोर्ट में लड़ाई लड़ एक दिन नौकरी कर हो गए सेवानिवृत्त
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फर्रुखाबाद। पुलिस मुठभेड़ में आंखों की रोशनी चले जाने से अशक्त होने पर सेवानिवृत्त किए गए वरिष्ठ उपनिरीक्षक ने कोर्ट में चार साल मुकदमा लड़कर नौकरी हासिल की। एक दिन नौकरी करने के बाद वह 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो गए। पुलिस अधीक्षक ने अशक्त उपनिरीक्षक को शाल भेंट कर विदाई दी। इस दौरान उनका पुत्र एसपी कार्यालय में उपस्थित रहा।
जनपद बदायूं थाना उसावा के गांव सिरौरा निवासी अमर सिंह वर्ष 2003 में मथुरा जिले के थाना सुरीर में वरिष्ठ उपनिरीक्षक के पद पर तैनात थे। 3 मार्च 2003 में बदमाशों की सूचना पर सिपाही नरेंद्र भदौरिया के साथ बाइक से बदमाशों की घेराबंदी करने गांव सिकंदरपुर के पास गए थे। वहां बदमाशों से मुठभेड़ होने लगी। बदमाशों की ओर से हुई फायरिंग में 12 बोर कारतूस के छर्रे अमर सिंह के चेहरे व दोनों आंखों में लग गए। इससे उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई। उपचार के बाद ठीक होकर लौटने पर कुछ साल मथुरा में काम किया।
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वहां से फर्रुखाबाद जिले के लिए मार्च 2012 में तबादला कर दिया गया। फर्रुखाबाद आने पर ज्वाइनिंग करने के बाद 30 जून 2014 के तत्कालीन एसपी ने उनको अशक्त होने पर सेवानिवृत्त कर दिया। इस आदेश के खिलाफ अमर सिंह ने उच्च न्यायालय में मुकदमा किया। करीब चार साल मुकदमा लड़ने के बाद 20 नवंबर 2018 को मुकदमा जीतने पर सफलता हासिल हुई। उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति को सात दिसंबर को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दिया। पुलिस अधीक्षक संतोष मिश्रा ने उच्च न्यायालय के आदेश पर 30 दिसंबर को अमर सिंह को दोबारा से नौकरी ज्वाइनिंग कराई।
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31 दिसंबर को अमर सिंह सेवानिवृत्त हो गए। एसपी ने सेवानिवृत्त होने पर अमर सिंह को शाल भेंट की। एसपी ने बताया कि अमर सिंह को चार साल का वेतन, फंड व अन्य सभी भत्तों का भुगतान होगा। दस हजार रुपये वह अपने स्तर से देंगे। अमर सिंह ने बताया कि उनके दो पुत्र और एक बेटी है। छोटा पुत्र पुलिस में है और पुत्री शिक्षक है। बड़ा पुत्र उनके साथ रहकर देखभाल करता है।
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