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Farrukhabad News: 80 नलकूप बंद, निजी के लिए नहीं मिल रहे ट्रांसफार्मर

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फर्रुखाबाद। जनपद में करीब 80 राजकीय नलकूप विभिन्न कारणों से बंद पड़े हैं। किसानों को सिंचाई के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निजी नलकूप लगाने के लिए भी किसानों को बिजली विभाग से ट्रांसफार्मर और अन्य सामग्री नहीं मिल पा रही है। आलू की बोआई की तैयारी में जुटे किसान सिंचाई को लेकर चिंतित हैं।
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जिले में कुल 346 राजकीय नलकूप संचालित दिखाए जा रहे हैं, पर हकीकत अलग है। कायमगंज क्षेत्र में विश्वबैंक फीडर के 30 नलकूप करीब बीस वर्ष तक बंद रहे। दो वर्ष पहले नए ट्रांसफार्मर और लाइनें डलवाने के बावजूद वे चालू नहीं हो सके हैं। इनकी बोरिंग, नाली या मोटर खराब होने जैसी कई समस्याएं हैं। मोहम्मदाबाद क्षेत्र में भी सौ नलकूपों में से तीस से अधिक नाली क्षतिग्रस्त होने या मोटर खराब होने के कारण नाकाम हैं। बढ़पुर, नवाबगंज और शमसाबाद ब्लॉक में भी ऐसी ही स्थिति है। नवाबगंज के नया नगला में 21 नंबर नलकूप छह दिन से, और नगला दमू का 165 नंबर नलकूप करीब डेढ़ माह से बंद पड़ा है। निजी नलकूप के लिए किसानों ने लाखों रुपये जमा किए हैं, लेकिन उन्हें बिजली विभाग से सामग्री नहीं मिल पा रही है।
नलकूपों के लिए स्वीकृति मिलने की उम्मीद
नलकूप विभाग के सहायक अभियंता सुनील निगम ने बताया कि मोटर खराब होना और ठीक होना नियमित कार्य है। उन्होंने कहा कि नाली निर्माण के लिए 59 नलकूपों का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। स्वीकृति मिलते ही नाली निर्माण का कार्य शुरू करा दिया जाएगा। निगम ने यह भी बताया कि विश्वबैंक फीडर के 30 नलकूप कई वर्षों तक बंद रहे, जिससे उन्हें चालू करने में दिक्कत आ रही है।
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स्टोर में आ गए हैं तार
बिजली विभाग के स्टोर प्रभारी ने 51 निजी नलकूपों की लंबित सामग्री पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 106 किलोमीटर तार (बीजल) स्टोर में प्राप्त हो गया है, जिसे किसान ले जा सकते हैं। चौबीस ट्रांसफार्मर भी रखे हैं, जिनका वितरण शीघ्र किया जाएगा। शेष किसानों को ट्रांसफार्मर आने पर उपलब्ध कराए जाएंगे। स्टोर में पिन इंसुलेटर की कमी है, जो जल्द ही आने वाले हैं।
किसानों चंदा कर खरीदा मोटर कमालगंज विकास खंड के कंधरापुर गांव में किसानों ने एक अनूठी पहल की है। राजकीय नलकूप की मोटर बार-बार खराब होने से वे परेशान थे। मोटर की मरम्मत में धन खर्च होता था और कम से कम पंद्रह दिन लगते थे। विभाग से कोई मदद न मिलने पर किसानों ने चंदा किया। उन्होंने नई मोटर खरीदकर राजकीय नलकूप में लगाई है, जो अब चल रही है।
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