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सूफी संत की समाधि पर माथा टेक लिया आशीर्वाद

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फतेहगढ़ के मोहल्ला नवदिया स्थित परमसंत रामचंद्र महाराज के 94वें वार्षिक भंडारे में शनिवार को दूसरे दिन भी देशभर के अनुयायी जुटे रहे। सुबह ध्यान के साथ शुरू हुए कार्यक्रम के बाद ऊं शांती का जाप किया गया। उसके बाद भजन व सत्संग का आयोजन किया गया।
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सूफी संत रामचंद्र महाराज उर्फ लालाजी साहब का जन्म बसंत पंचमी पर दो फरवरी 1873 में हुआ। जबकि 14 अगस्त 1931 में महाराज ने शरीर त्याग दिया। उन्होंने गृहस्थ जीवन में रहकर सत्संग किया। इससे प्रभावित होकर उनके अनुयायियों का कारवां बढ़ता गया।

देश-विदेश तक उनके अनुयायी फैले हुए हैं। गुड फ्राइडे पर शुक्रवार को तीन दिवसीय 94वां वार्षिक भंडारा शुरू हुआ। शनिवार को दूसरे दिन सुबह दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित कई प्रांतों के अनुयायियों ने समाधि पर माथा टेककर आशीर्वाद लिया।
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ध्यान शुरू हुआ तो अनुयायी महात्मा रामचंद्र की याद में डूूबे नजर आए। सत्संग में प्रवचन सुनकर भक्त मंत्रमुग्ध हो गए। शिकोहाबाद से आए सौराज सिंह के अलावा आशीष सक्सेना, अभिषेक सक्सेना, दिव्यांश आदि ने बताया कि सूफी संत की पूजा-अर्चना करने से उन्हें आनंद की अनुभूति होती है।
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कार्यक्रम की व्यवस्था समीर कुमार व विनय कुमार ने देखी।


सूफी संत की समाधि पर माथा टेक लिया आशीर्वाद

महात्मा रामचंद्र महाराज का 94वां वार्षिक भंडारा

देश के कई प्रांतों से जुटे हजारों अनुयायी
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