फर्रुखाबाद। पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बरसात और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के चलते जिले में अब गंगा की बाढ़ से नुकसान होने लगा है। पंखियन की मडैया में अभी तक गंगा 60 मीटर तक कटान कर चुकी हैं। तीन पक्के मकानों के अलावा एक झोपड़ी भी गंगा की धारा में समा चुकी है। यदि यूं ही कटान चलता रहा तो गांव में बने 10 और मकान भी कटान की जद में आ सकते हैं।
शनिवार को नरौरा बांध से गंगा नदी में 80447 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे गंगा का जलस्तर 136.50 मीटर पर पहुंच गया। गंगा का चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर पर है। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 10 सेंटीमीटर दूर है। जलस्तर बढ़ने से गंगा के तट पर पंडों के घाटों में फिर से पानी भर गया। जिस कारण पंडा पूजा सामग्री व तख्तों को हटाकर ऊंचे स्थान पर ले गए। वहीं विकास खंड बढ़पुर के पंखियन की मडैया में कटान चरम पर है। यहां पर गंगा अभी तक 60 मीटर अंदर तक कटान कर चुकी हैं।
कटान में वन विभाग की लगभग 40 बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। यदि कटान का यही हाल रहा था तो गांव के सभी मकान कटान की जद में आ सकते हैं। क्षेत्रीय लेखपाल संजय कुमार कटान की जानकारी पर गांव में पहुंचे। उन्होंने बताया कि गांव में अभी तक दो पक्के मकान और एक झोपड़ी गंगा में समा चुकी है। जाकिर का मकान कटान के मुहाने पर है। मकान की नीव के नीचे पानी भरने लगा है। बताया कि अभी गांव के 10 मकान कटान की जद के पास हैं। यदि समय रहते कटान न रुका तो यह सभी मकान गंगा की बाढ़ में कट जाएंगे।
वर्ष 2024 में बनाई गई परकोपाइन बाढ़ में कटी
ग्राम प्रधान शाहिद ने बताया कि वर्ष 2023 में आई विकराल बाढ़ के दौरान 58 मकान गंगा में समा गए थे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष काफी नुकसान हुआ था। 2024 में बाढ़ न के बराबर रही। इस दौरान सिंचाई विभाग की ओर से परकोपाइन बनाने का काम किया गया। अबकी बाढ़ में परकोपाइन बहने लगे हैं। इसके चलते कटान होने लगा है। यदि इसी तरह कटान होता रहा तो पूरे गांव का अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा।
दो किलोमीटर दूर बाढ़ चौकी, पानी बढ़ने पर होती प्रभावित
जिला प्रशासन की ओर से पंखियन की मडैया के लिए बाढ़ चौकी गांव से दो किलोमीटर दूर बिलावलपुर के प्राथमिक विद्यालय में बनाई गई है। गंगा में पानी बढ़ने से यहां भी जलभराव हो जाता है। ऐसे में शहर क्षेत्र में रहमानिया स्कूल और सब्जी मंडी अर्रापहाड़पुर में शरणालय बनाया गया है।