फर्रुखाबाद। मिथुन उर्फ नीतू हत्याकांड में आरोपी मैनपुरी के पूर्व बसपा जिलाध्यक्ष समेत पांचों आरोपियों के पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट में कुछ नहीं निकला। शाहजहांपुर में जहां नीतू का शव बरामद हुआ था उसके आसपास किसी भी आरोपी के मोबाइल की लोकेशन भी नहीं पाई गई। इससे पुलिस ने मुकदमे के वादी को फिर से बुलाकर नए सिरे से जांच की कवायद शुरू की है।
मैनपुरी के थाना दन्नाहार के गांव नगला मठिया निवासी रक्षपाल का 25 वर्षीय पुत्र मिथुन उर्फ नीतू 24 जुलाई 2019 को थाना कमालगंज के मोहल्ला गांधीनगर निवासी बहन सुमन पत्नी राकेश के घर पर आया था। 25 जुलाई को वह सुबह दौड़ने गया लेकिन लौटा नहीं। सूचना पर पहुंचे भाई निरोत्तम ने कमालगंज थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। 27 जुुलाई को शाहजहांपुर के थाना मिर्जापुर गांव रसूलपुर के जंगल में भट्ठे के पास उसका शव मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत गला घोटने से होने की पुष्टि हुई। शाहजहांपुर पुलिस ने शव की शिनाख्त के लिए पर्चे छपवाए थे। पिता रक्षपाल व भाई निरोत्तम ने 17 अगस्त को थाना मिर्जापुर जाकर शव की पहचान की।
रक्षपाल ने जनपद मैनपुरी के बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष महाराम सिंह, उनके पुत्र मुकेश कुमार, जितेंद्र कुमार, कामता प्रसाद, रामबिहारी के खिलाफ कमालगंज थाने में नीतू का अपहरण कर हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई। तत्कालीन डीजीपी ओपी सिंह ने आईजी जोन मोहित अग्रवाल के निर्देशन में हत्याकांड की जांच के आदेश दिए। जांच में किसी भी आरोपी के मोबाइल की लोकेशन शाहजहांपुर में नहीं पाई गई। फर्रुखाबाद व शाहजहांपुर के एसपी ने संयुक्त रूप से घटना स्थल पर जाकर जांच और परिजनों से पूछताछ की थी। कोई नतीजा न निकलने पर पांचों आरोपियों व रक्षपाल का लखनऊ में पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट करवाया गया। इसमें पांचों आरोपियों की रिपोर्ट सामान्य आई है। इससे 13 माह बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। प्रभारी एसओ रामसेवक वर्मा ने बताया कि वादी को बुलाकर नए सिरे से इस हत्याकांड की जांच शुरू की जा रही है।