लोहिया अस्पताल परिसर में बने सरकारी आवास। संवाद
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फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में बने स्टाफ आवासों में 40 पर अवैध कब्जा है। एक चिकित्सक तो निजी अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं, पर वह सरकारी आवास में काबिज हैं। कुछ आवासों में ऐसे कर्मचारी और उनके परिवार रह रहे हैं, जो दस साल पूर्व रिटायर हो चुके अथवा उनका गैरजनपद स्थानांतरण हो चुका है। इनमें सीएमएस और सीएमओ दोनों के ही अंडर में काम करने वाले लगभग 10 डाक्टर भी शामिल हैं। सीएमएस ने बिजली बिल जमा करने और मकानों को खाली करने के नोटिस जारी कर दिए हैं।
लोहिया अस्पताल में बने आवासों में नियमानुसार जिले में तैनात कर्मचारी ही रह सकते हैं, मगर यहां पूरी तरह से मनमानी हावी है। लोहिया अस्पताल में पूर्व तैनात रहे एक डाक्टर इन दिनों शहर के आवास विकास तिराहे पर स्थित एक नर्सिंग होम में सात साल से सेवाएं दे रहे हैं। पर वह काबिज लोहिया अस्पताल के ही आवास पर हैं। यहां तैनात रहे एक नेत्र सहायक दस साल पहले कन्नौज और एक लिपिक लखनऊ स्थानांतरित हो गए। यही नहीं एक महिला लिपिक कई साल पहले स्थानांतरण होकर शाहजहांपुर गईं और रिटायर भी हो चुकी हैं। एक बरौन में तैनात रहे लिपिक भी रिटायर हो चुके समेत 40 से अधिक ऐसे आवास हैं, जिन पर डाक्टर और कर्मियों का अवैध कब्जा है।
सीएमएस ने बुधवार को लोहिया अस्पताल के निरीक्षण को पहुंचे डीएम के संज्ञान में यह मामला लाया, तो उन्होंने सख्ती दिखाई थी। कहा कि 15 दिन में हर हाल में आवासों पर अवैध कब्जेदारों को बाहर करें। निर्देशों के अनुपालन में सीएमएस डा. एसपी सिंह ने करीब 25 कब्जेदारों को नोटिस जारी कर उन्हें बकाया बिल जमा करने तथा शीघ्र आवास खाली करने को कहा है। इससे कर्मियों के परिजनों में हड़कंप मच गया है।
लोहिया अस्पताल के आवासों में रह रहे कई ऐसे कर्मचारी और डाक्टर हैं, जिनके शहर में मकान बने हैं। कुछ लोग रह भी रहे और कुछ किराये पर उठा रखे हैं, मगर सरकारी आवास में रहकर बिजली, पानी सब कुछ फ्री में फूंक रहे हैं। डीएम मानवेंद्र सिंह ने बुधवार देर रात स्वास्थ्य विभाग संग बैठक करके सीएमओ को निर्देश दिए कि वह तुरंत ऐसे कर्मियों की सूची बनाएं, जो गैरजनपद स्थानांतरित हो गए और लोहिया अस्पताल के आवासों पर कब्जा किए हैं। उनका वेतन रुकवाने की कार्रवाई अमल में लाएं।
लोहिया पुरुष अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डा. एसपी सिंह ने इस संबंध में कहा कि डीएम के निर्देशों के अनुपालन में अवैध कब्जेदारों को आवास खाली करने ही होंगे। उनसे नियमानुसार वसूली भी की जाएगी। नोटिस जारी करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। खाली होने के बाद जरूरतमंद स्टाफ को आवास मुहैया कराने में आसानी होगी।