फर्रुखाबाद। विकास कार्य कराए बिना भुगतान करने के मामले में रिटायर्ड सचिव और निवर्तमान प्रधान से 4.06 लाख रुपये की रिकवरी की जाएगी। निवर्तमान प्रधान ने एक माह पूर्व भेजे गए नोटिस का जवाब नहीं दिया है, जबकि तत्कालीन सचिव (अब रिटायर) अपने स्पष्टीकरण में साक्ष्य नहीं दे सका। इस पर डीपीआरओ ने रिकवरी कराने के लिए पत्रावली जिलाधिकारी को भेज दी है।
कमालगंज ग्राम पंचायत नगला खेमरेंगाई में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों में कराए गए कार्यों का बीडीओ ने निरीक्षण किया तो कई कार्य मौके पर मिले ही नहीं, जबकि कई अधूरे कार्य होने के बावजूद भुगतान कर दिया था। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने एक फरवरी को डीआरडीए के पीडी और सहायक अभियंता की कमेटी गठित कर जांच कराई।
जांच कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट में कहा कि नगला खेमरेंगाई के प्राथमिक विद्यालय में मरम्मत व टाइल्स कार्य, झूला, चहारदीवारी व गेट निर्माण, उच्च प्राथमिक विद्यालय में मरम्मत कार्य, पूर्व माध्यमिक विद्यालय में दरवाजा व खिड़की कार्य, प्राथमिक विद्यालय दलेलनगर में अतिरिक्त कक्षा कक्ष का मरम्मत कार्य, इंटरलॉकिंग, भवन मरम्मत, टाइल्स के निर्माण कार्य के अलावा ग्राम सभा में कुर्सी, मेज आदि फर्नीचर खरीद में चार लाख 6231 रुपये का दुरुपयोग किया गया।
ये कार्य मौके पर गायब और अधूरे मिले हैं। इस पर जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने 9 मार्च को निवर्तमान प्रधान व तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी (अब रिटायर) सुरेश चंद्र पाल को नोटिस जारी कर 15 दिन में साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण तलब किया। जवाब न मिलने पर एफआईआर दर्ज कराकर राजस्व वसूली कराने के आदेश दिए थे। डीपीआरओ शिवशंकर सिंह ने बताया कि निवर्तमान प्रधान ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है। रिटायर्ड सचिव के स्पष्टीकरण में जो साक्ष्य है, वे संतोषजनक नहीं है। इससे दोनों से वसूली की जाएगी। उन्होंने स्वीकृति के लिए पत्रावली जिलाधिकारी को भेज दी है।
रिटायर्ड सचिव ने बेटे की फर्म के नाम किया भुगतान
ग्राम पंचायत अधिकारी सुरेश चंद्र पाल के पास कमालगंज एडीओ का भी चार्ज था। जनवरी में वे सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने अपने बेटे आशीष पाल की फर्म के नाम झूले का भुगतान किया था, जबकि झूला लगा ही नहीं।
जेएनवी रोड निवासी आशीष पाल ने बताया कि उसने करीब 50 ग्राम पंचायतों में झूले लगवाए हैं। नगला खेम रैंगाई में वह झूला पहुंचा चुके थे, जिसे लगवाना प्रधान की जिम्मेदारी थी। उन्होंने जिन स्कूलों में झूले लगाए हैं, संबंधित ग्राम पंचायत से भुगतान भी ले चुके हैं। जांच रिपोर्ट में फर्म को झूला लगाने का आदेश न होने और कोटेशन न लिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।