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अतिक्रमण कर बनाई गईं 50 साल पुरानी 33 दुकानें ध्वस्त

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शहर के रोडवेज बस स्टैंड पर बनी दुकानें ढहाता बुलडोजर। - फोटो : FARRUKHABAD
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बस अड्डे के बाहर बनीं 50 साल पुरानी 33 दुकानें ध्वस्त
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फर्रुखाबाद। रोडवेज की जमीन पर अतिक्रमण करके बनाई गईं 33 दुकानों को बुधवार को जमींदोज कर दिया गया। चार बुलडोजर ने पांच घंटे काम किया। दुकानों में लाखों रुपये का सामान दब गया। कई परिवार रोते-बिलखते रहे। सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ सिटी समेत कई थानों की पुलिस-पीएसी ने किसी को बोलने तक का मौका नहीं दिया। कई लोग बैनामा दिखाते रहे। मामूली नोकझोंक भी हुई, मगर अफसरों ने एक न सुनी।
सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार मौर्य, सीओ सिटी राजवीर सिंह, ईओ रविंद्र कुमार सुबह 11 बजे लालगेट पर पूरे अमले के साथ पहुंचे। शहर कोतवाल, मऊदरवाजा, फतेहगढ़ थानों की पुलिस और बड़ी संख्या में पीएसी पहले ही तैनात कर दी गई थी। साढ़े 11 बजे लालगेट से बद्रीविशाल कॉलेज तक नो-एंट्री जोन घोषित कर दिया। सिटी मजिस्ट्रेट ने माइक से दुकानदारों को आधा घंटे में सामान निकालने को कहा। पालिका कर्मी भी लगाए गए। दुकानदारों ने आनाकानी की, तो सिटी मजिस्ट्रेट ने बुलडोजर चलाने के निर्देश दे दिए।
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चार बुलडोजर से पहले बस अड्डे के सामने की 25 दुकानों को ढहाया गया। इसके बाद मंदिर के बाहर बनीं आठ दुकानें भी जमींदोज की गईं। कुछ दुकानें तीन-तीन मंजिल बनी थीं। उन्हीं में आवास भी थेे। दुकानदारों की हीलाहवाली और सिटी मजिस्ट्रेट की सख्ती से दुकानों के अंदर मौजूद लाखों रुपये का सामान बर्बाद हो गया। आशियानों और रोजगार को गिरता देख कई परिवार बिलखते रहे। कुछ ने भिड़ने का प्रयास किया, मगर सिटी मजिस्ट्रेट ने फटकार दिया। दुकानों के ध्वस्तीकरण के वक्त एआरएम आरसी यादव आदि अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे।
‘ पालिका और राजस्व विभाग से जांच कराई गई। दुकानें रोडवेज की जमीन पर बनी थीं। सरकारी जमीन पर कब्जा करने का अधिकार किसी को नहीं है। अन्य कई स्थान ऐसे हैं, जहां लोगों ने कई-कई दशक से सरकारी जमीन कब्जा ली है। उसे भी मुक्त कराया जाएगा। रोडवेज की दुकानें गिराना कब्जा करने वालों के लिए सबक भी है।’ -अशोक कुमार मौर्य, सिटी मजिस्ट्रेट
अब कराएंगे सुंदरीकरण : एआरएम
एआरएम आरसी यादव ने बताया कि जिलाधिकारी और सिटी मजिस्ट्रेट के प्रयास से रोडवेज की जमीन कब्जा मुक्त हुई है। इस पर अब किसी को भी कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। जाम से मुक्ति मिलेगी। अब सामने के स्थल का सुंदरीकरण कराने के लिए विभाग को पत्र लिखा जाएगा।
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2017 से रोडवेज प्रशासन कर रहा था प्रयास
रोडवेज बस स्टैंड का नया भवन 2017 में बनना शुरू हो गया था। उसी समय तत्कालीन एआरएम अंकुर विकास ने परिसर की नापजोख कराई थी। तभी पता चला कि मंदिर की जमीन और बाहर की सभी दुकानें रोडवेज की जमीन पर कब्जा करके बनाई गईं हैं। उन्हीं ने दुकानों को हटाने के लिए लिखापढ़ी शुरू की थी। तीन साल बाद प्रयास सफल हुआ है।
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