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डायरिया की चपेट में आ रहे बच्चे व बुजुर्ग

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क्षेत्र में डायरिया, वायरल बुखार, टाइफाइड का कहर जारी है। इसकी चपेट में बच्चे व बुजुर्ग आ रहे हैं। संक्रामक रोगों की चपेट में आने वाले मरीजों की संख्या सीएचसी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में भी तेजी से बढ़ रही है। सीएचसी में डाक्टरों की कमी से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
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सुबह से ही पर्चा बनवाने को लंबी लाइन लग जाती है। रोजाना करीब 100 से 150 मरीज इन बीमारियों से ग्रसित पहुंच रहे हैं। बढ़ते तापमान के साथ संक्रामक बीमारियां पांव पसार रही हैं। गंदगी और दूषित पानी के कारण बढ़ रहे मरीज अस्पताल का रुख कर रहे हैं।


डायरिया, टाइफाइड, बुखार आदि बीमारियों से परेशान मरीजों को अस्पताल में पर्चा बनवाने को लाइन में लगना पड़ रहा है। डॉक्टरों की कमी से दिखाने के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। यहां इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक एक ही डाक्टर के भरोसे है।
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ओपीडी में संविदा पर तैनात एक डाक्टर उनका सहयोग करते हैं। इन दिनों 450 से 500 मरीजों की ओपीडी में 100 से 150 लोग डायरिया, टाइफाइड, वायरल बुखार से पीड़ित होते हैं। इनमे 50 मरीजों की रोज खून की जांच भी होती है। इससे लैब में भी भीड़ रहती है।


गांव मई निवासी रामनरेश ने बताया सोमवार रात हल्के बुखार के साथ पेट मे दर्द होने लगा। एक उल्टी हुई। कमजोरी महसूस होने पर दवा लेने आए हैं। गांव सिनौली निवासी भूमराज ने बताया कई दिनों से बुखार था। साथ ही दस्त होने लगे। गांव में दवा ली। कोई लाभ नहीं मिला, तब अस्पताल में आए मगर यहां भी भीड़ लगी है।


सीएचसी के डा.अमरेश कुमार ने बताया डायरिया से ग्रसित मरीज को बुखार, दस्त, पेट दर्द व कमजोरी महसूस होती है। यह बैक्टीरियल वायरस संक्रमण होता है। दूषित भोजन व पानी इसकी मुख्य वजह बनते हैं। पानी की ज्यादा कमी होने पर मरीज की जान भी जा सकती है।


इस बीमारी से बचने के लिये धूप में कम से कम निकलें। घर में बनने वाले पेय पदार्थ नीबू पानी, शिकंजी नियमित लेते रहें। ऐसे लक्षण दिखने पर इलेक्ट्रॉल व ओआरएस का घोल पीना शुरू कर दें। ज्यादा कमजोरी लगने पर डाक्टर से संपर्क करें।


प्राइवेट डा.विकास शर्मा का कहना है इन दिनों डायरिया आदि बीमारियों से बचाव के लिए घर के आसपास सफाई का विशेष ध्यान रखें। घरों में पानी न जमा होने दें। कूलर का पानी रोजाना बदलें। पानी का सेवन उबालकर या आरओ का इस्तेमाल करें।
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डायरिया की चपेट में आ रहे बच्चे व बुजुर्ग

गर्मी में बढ़ रही मरीजों की संख्या

डाक्टरों की कमी से देर में आता नंबर
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