फर्रुखाबाद। जिले में संक्रामक रोग पूरी तरह से पांव पसार चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास इन संक्रामक रोगों से निपटने के लिए दवा और डॉक्टरों दोनों का टोटा नजर आ रहा है। गांव महोरिकापुर में पिछले 15 दिन से डायरिया फैला है। यहां करीब 25 लोग डायरिया से पीड़ित हैं।
जानकारी के बावजूद आज तक कोई भी स्वास्थ्य कर्मचारी यहां डायरिया से पीड़ित रोगियों की खोज खबर लेने गांव नहीं पहुंचा है। 15 दिन पहले यहां डायरिया से पीड़ित एक बच्ची की मौत हो चुकी है, जबकि उसकी दो बहनें बीमार चल रही हैं। गांव के राकेश कुमार का कहना है कि उसकी बेटी काजल (4) डायरिया से पीड़ित होकर अपना दम तोड़ चुकी है। नेहा (7) और इंदू (2) बीमार चल रही हैं, जिनका वह झोलाछाप चिकित्सक से इलाज करा रहा है।
राकेश की पत्नी सुशीला देवी भी उल्टी व दस्त से पीड़ित है। इस गांव में करीबन ढाई हजार लोग निवास करते हैं। इनमें पारुल पुत्री कुंवरपाल, सुरेश कुमार पुत्र हुलासी और सुनैना समेत 25 लोग डायरिया से पीड़ित हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या बच्चों की सामने आई है।
न्यू पीएचसी में दवा व डॉक्टर की कमी
गांव से करीबन 100 मीटर की दूरी पर न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा यूनानी अस्पताल चल रहे हैं। इन अस्पतालों का आलम यह है कि न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फार्मासिस्ट अमित कुमार के हवाले है। यहां कहने के लिए तो डॉ. अजय बाजपेई की नियुक्ति है लेकिन फार्मासिस्ट का कहना है कि चार माह से डॉक्टर नहीं आए हैं। जीवनरक्षक दवाओं का भी टोटा है। मांगपत्र भेजा गया है। शीघ्र ही दवा आ जाएंगी। उनसे जब उल्टी-दस्त की दवाइयों के संबंध में जानकारी की गई तो कहा कि जो दवाएं हैं, उनसे काम चलाया जा रहा है।
लोहिया अस्पताल व सीएचसी हैं दूर
मोहम्मदाबाद से महोरिकपुर गांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 15 किमी और लोहिया अस्पताल करीब 16 किमी दूर है। इसके चलते अधिकांश गांववाले झोलाछाप डॉक्टरों के यहां ही इलाज करा रहे हैं।
बोले जिम्मेदार
चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की कमी चल ही रही है। महोरिकापुर में डायरिया फैलने की उन्हें सूचना नहीं मिली है। गुरुवार को चिकित्सीय टीम को भेजकर पीड़ितों की जांच व उपचार कराया जाएगा।
डॉ. अमित अग्रवाल (प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी मोहम्मदाबाद)