जमीनों की खरीद- फरोख्त के लिए नई सर्किल दरें तय कर दी गई हैं। प्रशासन
स्तर से रिहायशी, कृषि एवं व्यावसायिक भूमि 5 से 20 फीसदी तक बढ़ोत्तरी की
बात कही गई है। हालांकि आपत्तियों पर संशोधन की गुंजाइश बाकी है। अगर
ऐतराज नहीं है तो एक अगस्त से नई दरों जारी कर दी जाएंगी। सर्किल दरों के
संशोधन का पैमाना लोगों के सामने आने वाली अड़चनों, अतीत में हुए आंदोलनों,
समस्याओं और पक्षकारों को दी जा रही रियायत आदि मुद्दों की पड़ताल करती
रिपोर्ट।
विकसित क्षेत्र में रेट बढ़ें तो अविकसित में घटें
जिला
प्रशासन ने जमीनों की खरीद-फरोख्त के लिए नई सर्किल दरें लागू करने का
जैसे ही ऐलान किया तो इससे जुड़े अधिवक्ताओं और कातिबों का इस ओर ध्यान
गया। अफसरों के मुताबिक कटरी क्षेत्रों से लेकर विकसित-अविकसित क्षेत्रों
में 5 से 20 फीसदी बढ़ाई गई दरों के जानकार गुणा-भाग करने में जुट गए हैं।
इनका कहना है कि एक्ट में तो सर्किल रेट में
संशोधन की बात कही गई। सीधी
बढ़ोत्तरी करना मनमानी होगी। यदि विकसित क्षेत्रों में रेट बढ़ाए जा सकते
हैं तो पिछड़े और अविकसित क्षेत्रों में दरें घटना भी चाहिए। सवाल यह भी
उठाए जा रहे हैं कि कार्यालय में बैठकर सर्किल दरें तय नहीं हो सकतीं।
भौतिक सत्यापन जरूरी है। दस्तावेज लेखकों का यह भी मानना है कि यह मुद्दा
जनप्रतिनिधियों के स्तर का है। उन्हें आगे आकर जनता के हितों की आवाज उठाना
चाहिए। लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है।
एक माह चला था आंदोलन
सर्किल
रेट में बढ़ोत्तरी को लेकर वर्ष 2014 में एक माह तक आंदोलन चला था। इस
दौरान बैनामा रजिस्ट्री का कार्य पूरी तरह ठप कर दिया गया। वकीलों की तरफ
से अदालत में बढ़ी दरों को चुनौती दी गई पर नतीजा सिफर रहा। माना जा रहा है
कि इस बार वकील कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं । इससे बढ़ी दरें जस
की तस लागू होने के आसार हैं।
जिस
क्षेत्र में जमीनों की जैसी खरीद व फरोख्त होती है। बड़े अफसर उसका जायजा
लेते हैं और क्षेत्रों को विकसित व अविकसित क्षेत्रों के दायरे में सर्किल
दरें तय कर दी जाती हैं। नियमानुसार मूल्यांकन सूची को जनता के सामने रखा
जाता है। यदि कोई जायज आपत्ति मिलती है तो उसमें संशोधन कर दिया जाता है।
नई सर्किल रेट के बारे में भी ऐसा ही किया जाएगा। -राजेश तिवारी (सब
रजिस्ट्रार)
जनप्रतिनिधि उठाएं जनता की आवाज
तहसील
सदर बार एसोसिएशन अध्यक्ष मंजेश कटियार का कहना है कि दरअसल सर्किल रेट
में बढ़ोत्तरी का मुद्दा जनप्रतिनिधियों के स्तर का है। जनता के हितों की
आवाज उन्हें आगे आकर उठाना चाहिए। उनका कहना है कि शहरी क्षेत्रों में
रजिस्ट्री शुल्क लागू करना तो ठीक है। मगर गांवों में जब इस पैसे का
इस्तेमाल नहीं होता है तो शुल्क नहीं लेना चाहिए।
वरिष्ठ
अधिवक्ता दयाशंकर तिवारी का कहना है कि सर्किल दरों में संशोधन न कर रेट
बढ़ाए जा रहे हैं। अफसर कमरे में बैठकर जमीनों का मूल्यांकन करते हैं।
भौतिक सत्यापन किया जाए तो असलियत सामने आ जाएगी।
आवासीय सर्किल दरें प्रति वर्ग मीटर में
स्थान पुरानी नई
मोहल्ला अढ़तियान- 6000 7000
गांव अमेठी जदीद- 3000 3800-4200
कटरा अहमद गंज- 18000 21000
कसरट्टा- 9000 11000
किराना बाजार- 16000 19000
कृषि योग्य भूमि प्रति हेक्टयर
जीरागौर- 11 लाख 12 लाख
झिझुकी -11 लाख 13 लाख
पतौंजा- 11 लाख 13 लाख
झसी- 11 लाख 13 लाख
रजीपुर- 23 लाख 25 लाख
नोट- रजिस्ट्री शुल्क एक व दो प्रतिशत भी देय होगा।
जमीन की खरीददारी पर छूट की दर
- महिलाओं को पुरुषों की तुलना में स्टांप ड्यूटी पर 1 फीसदी छूट
-सामान्य विकलांगों को पांच लाख रुपये की खरीद पर स्टांप ड्यूटी में पूरी छूट
- 80 प्रतिशत विकलांगों को 20 लाख रुपये की खरीद पर स्टांप ड्यूटी में पूरी छूट
- पूर्व सैनिकों को 200 वर्ग मीटर प्लाट खरीदने पर स्टांप ड्यूटी में पूरी छूट। इसके लिए इन्हें सर्टीफिकेट प्रस्तुत करना होगा।
बढ़े सर्किल रेटों के विरोध में बार एसोसिएशन
एक अगस्त से लागू होने वाले सर्किल रेटों का बार एसोसिएशन ने विरोध किया
है। वकीलों ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा है। वकीलों ने
कहा कि कि देश में हर वस्तु के रेट गिर रहे हैं। ऐसे में जमीनों के रेट
बढ़ाना गलत है। उन्होंने सर्किल रेट तीन साल में बढ़ाए जाने की मांग की।
सोमवार
को बार एसोसिएशन पदाधकिारियों ने एसडीएम बीडी वर्मा को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2012 से अब तक सर्किल रेट बढ़कर तीन गुने हो
गए हैं। वकीलों ने सर्किल रेट की जारी प्रस्तावित सूची को त्रुटिपूर्ण
बताते हुए कहा कि कई गांवों में बिना जांच कराए ही सूची तैयार की गई है।
उन्होंने कई गांवों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन
गंावों में पिछले कई
सालों से जमीन की कोई खरीद फरोख्त नहीं हुई है। इसके बावजूद रेट बढ़ाए गए
हैं। कुछ गांवों के रेट राजनैतिक लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए कम किए गए
हैं। उन्होंने रेेट बढ़ाए जाने का विरोध करते हुए रेट लिस्ट का पुनरीक्षण
करने और पूर्व की भांति तीन साल में रेट बढ़ाए जाने की मांग की। उन्होंने
कहा कि यदि जल्द उनकी मांगों पर विचार कर समाधान न किया गया तो बार
एसोसिएशन जनहित याचिका दायर करने के लिए मजबूर होगी।
तीन साल में दो गुना हुआ सर्किल रेट
नगर क्षेत्र में जमीन खीदने वालों को एक अगस्त से एक डिस्मिल जमीन पर लगभग
41 हजार रुपये अधिक देने होंगे। नगर क्षेत्र के हर मोहल्ले में प्रतिवर्ग
मीटर एक हजार रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है। डीएम कार्यालय से जारी
सर्किल रेट सूची के अनुसार नगर के सीपी स्कूल से गल्ला मंडी चौराहे तक अभी
तक 21 हजार रुपये प्रतिवर्ग मीटर का रेट था। यह
बढ़कर 22 हजार प्रतिवर्ग
मीटर कर दइईया गया है। वर्ष 2012 में इस स्थान का रेट 12 हजार रुपये वर्ग
मीटर था। तीन वर्षों में सर्किल रेट को लगभग दो गुना कर दिया गया है। बढ़े
सर्किल रेटों के अनुसार नगर क्षेत्र के प्रत्येक मोहल्ले में गतवर्ष की
तुलना में एक हजार रुपये प्रतिवर्ग मीटर की बढोत्तरी की गई है। इसके अनुसार
खरीददार को एक डिस्मिल पर
लगभग 41 हजार रुपये का भार उठाना पड़ेगा। शहर के
अधिकांश मोहल्लों में अभी तक 20000-22000 हजार प्रतिवर्ग मीटर का सर्किल
रेट था। इसे बढ़ाकर 21000-23000 कर दिया गया है। हर साल सर्किल रेट बढने
से नगर में जमीनों के भाव आसमान छूने लगे हैं।