शीतगृह में भंडारित आलू की निकासी न होने से किसान और शीतगृह मालिकों के माथे पर चिंता की रेखाएं उभर आई हैं। अक्तूबर में पूना तथा अन्य प्रदेशों का नया आलू बाजार में आ जाने से आलू के भाव औंधे मुंह गिर जाएंगे। किसानों और शीतगृह मालिकों का मानना है कि हालात यही रहे तो नवंबर में आलू को फेंकना होग्र्रा।
जिले के 65 शीतगृहों में साढ़े पांच लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित किया गया था। अब तक केवल 35 फीसदी ही शीतगृहों से निकासी हो सकी है। 65 फीसदी आलू अब भी शीतगृहों में भंडारित है। प्रगतिशील किसान नारद सिंह का कहना है कि पूना और होशियारपुर में आलू की अगैती फसल की गड़ाई हो चुकी है।
यह आलू 15 अक्तूबर तक बाजार में आ जाएगा और 15 नवंबर तक फर्रुखाबाद का भी अगैती फसल का आलू बाजार में आने से शीतगृहों में भंडारित आलू के दाम एकाएक गिर जाएंगे, जिससे किसान भंडारित आलू की निकासी बंद कर देगा।
स्वामी रामाधार शीतगृह जहानगंज के मालिक मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि मौजूदा समय में पुखराज आलू के भाव 600 रुपये प्रति पैकेट से गिरकर 450 रुपये पैकेट और चिपसोना आलू के भाव 950 रुपये से गिरकर 650 रुपये प्रति पैकेट तथा 3797 आलू के भाव 750 रुपये से गिरकर 550 रुपये प्रति पैकेट पहुंच गए हैं।
एकाएक आलू पर आई मंदी के कारण किसानों और व्यापारियों ने भंडारित आलू की निकासी बंद कर दी है। बाहर की मंडियों में भी आलू की मांग नहीं हो रही है। लक्ष्मी कोल्ड स्टोरेज के मालिक उमेश अग्रवाल का कहना है कि लोडिंग के लिए ट्रक न मिलने के कारण किसान और व्यापारी दोनों निकासी नहीं कर रहे हैं। उनका मानना है कि शीतगृहों में बचा 65 फीसदी आलू में से 35 फीसदी आलू बीज के रूप में खपत हो जाएगा।
20 फीसदी आलू सब्जी में खपत हो जाएगा। 15 फीसदी आलू को शीतगृह मालिकों को फेंकना पड़ेगा। नया आलू बाजार में आने के बाद इतनी बड़ी मात्रा में भंडारित आलू की निकासी करना मुश्किल हो जाएगा।
आलू किसान देवेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार की आलू निर्यात नीति न बनाए जाने के कारण प्रतिवर्ष आलू की स्थिति खराब हो जाती है।
अभी बीच में आलू की स्थिति में भारी सुधार हुआ था लेकिन एकाएक हरी सब्जियों के दाम गिर जाने के कारण आलू के भाव में भारी गिरावट आई है और आने वाले समय में ज्यादा गिरावट आने की संभावना है। आलू विभाग के निरीक्षक एपी सिंह सेंगर का कहना है कि आलू के भाव और नीचे जा सकते हैं। नया आलू बाजार में आने के बाद पुराने आलू की मांग खत्म हो जाएगी।