फर्रुखाबाद। राजेपुर ब्लाक में मनरेगा के कार्यों का भुगतान चहेतों को कर दिया गया। इससे नाराज प्रधानों ने बीडीओ को फोन कर जमकर खरीखोटी सुनाईं। कमीशन लेकर भुगतान करने का आरोप लगाकर अभद्रता की। दो दिन में 2.65 करोड़ का भुगतान किया गया।
राजेपुर ब्लाक में मनरेगा के कार्यों में पहले से ही मानक टूटे चल रहे हैं। नियमानुसार मनरेगा के कार्य में 60 प्रतिशत धनराशि मजदूरी पर, जबकि 40 प्रतिशत मैटेरियल खरीद पर खर्च की जानी चाहिए। कमीशन के खेल में यहां मानकों को ताख पर रखकर पक्के कार्य के इस्टीमेट स्वीकृत कर दिए गए थे।
मार्च में जब सीडीओ ने मॉनीटरिंग कराई तो मानक से अधिक करीब 3.50 करोड़ के काम स्वीकृत पाए गए। अधिकारियों को फंसता देख लीपापोती शुरू हुई और करीब तीन करोड़ के कार्यों की आईडी डिलीट कराई गई। इसके साथ ही शेष कार्य जिलाधिकारी से अनुमोदन लेकर पास कराए गए थे।
बीडीओ गगनदीप सिंह के स्थानांतरण के बाद मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी का चार्ज कमालगंज के बीडीओ आलोक आर्या को दिया गया, जबकि अशोक कुमार दुबे को बीडीओ बनाया गया था। एक जुलाई को स्थानांतरण के क्रम में कौशल किशोर गुप्ता राजेपुर के बीडीओ बने, लेकिन मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी का डोंगल कमालगंज बीडीओ का ही चलता रहा। दो दिन पूर्व मनरेगा खाते में धनराशि डाली गई तो भुगतान के लिए होड़ मच गई।
कमालगंज बीडीओ आलोक आर्या ने अपने ब्लाक में ही बैठकर राजेपुर ब्लाक के प्रधानों को बुलाकर 2.65 करोड़ रुपये के भुगतान कर दिए। जबकि 2.20 करोड़ के भुगतान अभी किए जाने हैं। कुछ प्रधानों का आरोप है पांच प्रतिशत कमीशन देने वालों को नियम विरुद्ध तरीके से भुगतान किया गया।
विभागीय जानकार भी इसी तरह भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। इससे नाराज प्रधानों ने बीडीओ को फोन कर कमीशनबाजी का आरोप लगाते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी किया। यह भी आरोप लगाया कि कमीशन के खेल में बीडीओ की तैनाती होने के बाद भी डोंगल अपना चलाते रहे।
कमालगंज बीडीओ आलोक आर्या ने बताया कि उन्होंने नियमानुसार 2.65 करोड़ के भुगतान किए हैं। कमीशन लेने का आरोप गलत है। कई प्रधानों ने फोन करके उनसे गालीगलौज तक की, वह उन्हें जानते भी नहीं हैं। उन्होंने बुधवार को राजेपुर ब्लाक से अपना डोंगल कैंसल कराकर बीडीओ कौशल किशोर गुप्ता का डोंगल चालू करा दिया है। आगे के भुगतान राजेपुर बीडीओ ही करेंगे।