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शहर में हैं 19 छोटे बड़े नाले, 50 फीसदी की सफाई नहीं

Fri, 26 Jun 2015 11:23 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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हल्की बूंदाबांदी ने मंगलवार की देर रात मानसून की आहट दे दी है। बुधवार को दिन में भी बादल आते जाते रहे। बरसात को लेकर शहरी खुश भी हैं और भयभीत भी। खुशी गर्मी से राहत की है और भय जलभराव से घरों में कैद होने की मजबूरी का है। शहर में बरसात के बाद घंटों तक गलियों में पानी चलता रहता है। निचले मोहल्लों में बरसात का पानी घरों में
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घुसकर गृहस्थी का सामान बहा ले जाता है। पालिका अभी भी शहर के सभी नालों को साफ नहीं करवा पाई है। जिन नालों के साफ होने का दावा किया जा रहा, वहां तलीझाड़ सफाई नहीं हुई है। शहर में 19 छोटे-बड़े नाले हैं। मई के अंतिम सप्ताह तक इनकी तलीझाड़ सफाई होनी थी। इसमें पालिका ने लापरवाही बरती। नालों से अतिक्रमण हटवाने के लिए कोई कार्रवाई

नहीं हुई। कोरम पूरा करने के लिए नालों से सिल्ट निकाल दी गई। तलीझाड़ सफाई की कोशिश नहीं की गई । पालिका के हाकिम भी आंखें मूंदे रहे। मानसून की दस्तक हो चुकी है और बादल अभी बरसने लगे तो शहर को जलभराव से कोई नहीं बचा पाएगा। शहरी बाशिंदों को इस बार भी बरसात में नर्क भुगतना पड़ेगा। बीबीगंज, गढ़ी मुशर्रफ और आवास विकास के
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नालों की सफाई की ही नहीं गई। बरसात के बाद शहर की रफ्तार सुस्त पड़ जाती है। शहर के नए व पुराने सभी मोहल्लों में जलभराव की नौबत बनती है। पुराने मोहल्ले ज्यादा संवेदनशील हैं। आबादी बढ़ने के बाद भी पालिका ने नया ड्रेनेज प्लान ही नहीं बनाया है। सियासी खेल में नालों से अतिक्रमण हटाने की जहमत भी नहीं उठाई गई। हाल यह है कि बरसात होने की नौबत बनते ही खुशी की बजाय शहरियों की आंखों में जलभराव का डर कौंधने लगता है।
 
शहर के कुल वार्ड -- 37
आबादी (फर्रुखाबाद/ फतेहगढ़)
कुल आबादी- 2 लाख 75 हजार 754
पुरुष आबादी -1 लाख 45 हजार 515
महिला आबादी- 1 लाख 30 हजार 239
 
इन मोहल्लों में होता है जलभराव
मदारबाड़ी, रस्तोगी मोहल्ला, घेरशामू खां, तलैया फजल इमाम, गंगा नगर,छावनी, खटकपुरा, पक्कापुल, गुदड़ी, नाला फिदाई, छक्का नाजिर कूंचा, तकिया नशरत शाह, कटरा बख्शी, गढ़ी मुशर्रुफ, भीकमपुर, हाता इस्लाम खां।
 
कर्मचारियों की फौज, नतीजे सिफर
नियमित कर्मचारी -315
संविदा कर्मचारी -308
ठेक पर सफाई कर्मचारी -102
 
नाला सफाई में दिक्कतें
- नालों पर अतिक्रमण।
- सफाई कर्मचारियों के पास संसाधनों का टोटा।
- जेसीबी का खराब होना।
- नालों के पानी की निकासी का इंतजाम न होना।
- बड़ी आबादी के मुताबिक ड्रेनेज प्लान न बनना।
- शहर सुनियोजित विकास न होना।
 
शहर डूबे पालिका की बला से
शहर जलभराव से शहर डूबे या गंदे पानी के संक्रमण से लोग अस्पताल पहुंच जाएं, पालिका की बला से। ईओ प्रमोद श्रीवास्तव को नालों की साफ सफाई के बारे में पता ही नहीं है। उनका कहना था कि सफाई निरीक्षक आशुतोष को जानकारी होगी। आशुतोष ने कॉल ही रिसीव नहीं की।
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