फर्रुखाबाद। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बेस लाइन सर्वे से छूटे ग्रामीणों को शौचालय निर्माण के लिए दो माह पूर्व ग्राम पंचायतों में धनराशि भेजी गई थी। मुख्य विकास अधिकारी ने समीक्षा के दौरान 15 मार्च तक शौचालय निर्माण पूर्ण कराकर ऑनलाइन फोटो अपलोड करने का अल्टीमेटम दिया था। प्रधानों की जुगलबंदी के चलते सीडीओ के आदेश पर सचिवों की मनमानी भारी है। अब तक 5344 शौचालयों का निर्माण न होने से फोटो अपलोडिंग नहीं की गई।
सरकार खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर शौचालय का निर्माण करा रही है। इसके लिए प्रत्येक लाभार्थी को 12000 रुपये दिए जाते हैं। बेस लाइन सर्वे से छूटे 20346 पात्र ग्रामीणों का चयन किया गया था। इनमें जनवरी व फरवरी में सभी ब्लाकों की करीब 300 ग्राम पंचायतों में 11243 शौचालयों की धनराशि भेजी गई थी। आदेश थे कि ग्राम पंचायत सचिव एक सप्ताह के अंदर शौचालय निर्माण कराने के साथ ऑनलाइन फोटो अपलोड करें।
गत दिनों मुख्य विकास अधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने प्रगति रिपोर्ट धीमी मिलने पर 15 मार्च तक शौचालयों का निर्माण पूर्ण कराकर फोटो अपलोड न होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके साथ ही शून्य प्रगति पर दो सचिवों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई। हालांकि आदेश के 10 दिन बाद भी 48 फीसदी शौचालयों के फोटो अपलोड नहीं किए गए। इनमें सात ग्राम पंचायतें तो ऐसी हैं जिनमें 195 शौचालयों की धनराशि पहुंचने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू तक नहीं हो सका। खास बात तो यह है कि शौचालय की धनराशि लाभार्थी के खाते में न भेजकर ठेके पर निर्माण कराया जाता है। उसमें भी मनमानी का खेल चल रहा है।
एडीपीआरओ किरन वर्मा ने बताया कि शौचालय निर्माण व ऑनलाइन फोटो अपलोडिंग की प्रगति रिपोर्ट वह सीडीओ को सौंपेंगी।