फर्रुखाबाद। जिला नगरीय विकास अभिकरण कार्यालय (डूडा) के शेल्टर होम में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन में पंजीकृत बेरोजगारों के बजाए ठेके पर कर्मचारी काम कर रहे हैं। ऐसे में पंजीकृत बेरोजगार भटकने को मजबूर हैं।
शासन के आदेश हैं कि डूडा के घटक राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (सीएलसी) में बेरोजगारों का पंजीकरण कर उन्हें जिले के सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में मांग के अनुसार रोजगार मुहैया कराए। जिले में रोडवेज बस स्टैंड के पास सीएलसी का कार्यालय भी बेरोजगारों के पंजीकरण के लिए खुला है। लेकिन फतेहगढ़ में सीएमओ कार्यालय के पास बने डूडा के अपने ही शेल्टर होम में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन केंद्र में पंजीकृत किसी भी बेरोजगार को रोजगार नहीं दिया गया है। जानकारी के मुताबिक शेल्टर होम संचालक ने अपने स्तर से एक प्रबंधक, तीन केयर टेकर, एक रसोइया, एक चौकीदार और एक सफाईकर्मी को लगा रखा है। इनमें से किसी का भी राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन में पंजीकरण नहीं है। गौरतलब है कि शेल्टर होम की देखभाल की जिम्मेदारी डूडा और नगर पालिका की है।
इस संबंध में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की प्रबंधक मेघा गुप्ता ने बताया कि शेल्टर होम के लिए संचालक ने कोई लड़के नहीं मांगे। मांगने पर सीएलसी में पंजीकृत युवाओं को भेजा जाएगा। वहीं शेल्टर होम संचालक आबिद मंसूरी ने बताया कि शेल्टर होम चलाने के अनुबंध में यह नहीं है कि राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन में पंजीकृत लोगों को रखा जाए। ब्यूरो
1200 में से सिर्फ 63 को मिला रोजगार
रोडवेज बस स्टैंड स्थित सीएलसी कार्यालय में लगभग 1200 बेरोजगारों ने पंजीकरण करा रखा है। सूत्रों की मानें तो अब तक मात्र 63 लोगों को ही रोजगार मिला है। बताया जाता है कि विभाग सीएलसी में पैसा भेजता है और इसके बाद सीएलसी पंजीकृत युवकों को भुगतान करती है। जिले के अन्य सरकारी विभाग सीएलसी में युवकों को नौकरी दिए जाने की डिमांड ही नहीं भेजते हैं। ब्यूरो