गंगा किनारे लगे पेड़ों को काटते ग्रामीण।
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फर्रुखाबाद। गंगा के उफान भरने से जिले के 163 गांवों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। शमसाबाद और अमृतपुर क्षेत्र के गंगा कटरी में बसे गांवों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पर पहुंचने पर पानी गांवों में भरना शुरू हो जाएगा। रामगंगा में भी खो हरेली रामनगर से छोड़े जाने वाली पानी की मात्रा को बढ़ा दिया गया है। इस कारण जलस्तर बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।
नरौरा और हरिद्वार से गंगा मेें अभी तक कम मात्रा में पानी छोड़े जाने से जलस्तर घट और बढ़ रहा था। लेकिन उत्तराखंड में लगातार बरसात होने के कारण गंगा में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा बढ़ गई है। गंगा का जलस्तर तीन दिन से लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 135.35 सेंटीमीटर था।
शनिवार को जलस्तर 35 सेंटीमीटर बढ़ने के कारण 135.70 सेंटीमीटर तक पहुंच गया था। रविवार को गंगा का जलस्तर 30 सेंटीमीटर और बढ़ने से वह 136.00 मीटर पर पहुंच गया है। नरौरा से गंगा में 84,472 और हरिद्वार से 16,4152 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस कारण दो दिन में गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी होना तय है। रामगंगा में खो हरेली रामनगर से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा को बढ़ा दिया गया है।
रविवार को रामगंगा में 12,211 क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया। इस कारण रामगंगा के जलस्तर में भी बढ़ोत्तरी होने शुरू हो गई। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर से अभी 60 सेंटीमीटर दूर है। लगातार जलस्तर बढ़ने से सदर तहसील के 25, कायमगंज तहसील क्षेत्र के 68 और अमृतपुर क्षेत्र के 70 गांवों पर बाढ़ का संकट आ सकता है। शमसाबाद, अमृतपुर क्षेत्र के कई गांवों में कटान शुरू हो गया है।