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अलग-अलग थे भारी, गठबंधन से बंटाढार

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वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा व बसपा ने अलग-अलग प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। इसमें बसपा प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए थे। इस बार दोनों दलों का गठबंधन हुआ और जिले से बसपा प्रत्याशी ने चुनाव लड़ा।
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पिछले चुनाव में दोनों दलों को मिले मतों पर नजर डालें तो दोनों दल अलग-अलग भारी थे, जबकि गठबंधन में तो बंटाधार हो गया। इस बार के चुनाव में गठबंधन को 22,086 मतों का घाटा रहा। हालांकि इस बार बसपा प्रत्याशी की जमानत जरूर बच गई।


वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में संसदीय सीट पर भाजपा से मुकेश राजपूत ने ही जीत हासिल कर कब्जा जमाया था। इन्होंने 4,06,195 वोट पाकर 1,50,502 मतों से जीत दर्ज की थी। जबकि प्रतिद्वंदी प्रत्याशी सपा से रामेश्वर सिंह यादव 2,55,693 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे।
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वहीं बसपा से जयवीर सिंह को 1,14,571 मिले। कुल पड़े मतों के 11.80 फीसदी वोट मिलने से बसपा की जमानत जब्त हो गई थी। 2019 के चुनाव में सपा व बसपा का गठबंधन हुआ। जिले से बसपा के मनोज अग्रवाल को टिकट मिला।


पूरी ताकत झोंकने के बाद इन्हें 3 लाख 48 हजार 178 वोट मिले। और अब तक के चुनाव में दो लाख 21 हजार 702 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। जबकि पिछले चुनाव में सपा व बसपा प्रत्याशियों को कुल मिलाकर 3,70,264 वोट मिले थे। इस बार हुुए गठबंधन को 22,086 मतों का नुकसान हुआ। हां, इतना जरूर हुआ कि इस बार बसपा प्रत्याशी की जमानत बच गई।
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अलग-अलग थे भारी, गठबंधन ने किया बंटाधार

सपा के सहारे बसपा की बची जमानत

पिछले चुनाव से भी घाटे में रहा गठबंधन
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