कायमगंज(फर्रुखाबाद)। भू-स्वामी की मौत के बाद उनके आश्रितों के नाम वरासत दर्ज कराने के लिए किसानों को तहसील के चक्कर लगाने पड़ते थे। इसके लिए सरकार ने ऑनलाइन वरासत दर्ज कराने की व्यवस्था की। इसमें कायमगंज तहसील अभी तक जनपद में नंबर वन साबित हुई है। लेखपालों के पास लैपटॉप न होने की वजह से मैन्युअल भी वरासत दर्ज की जा रही है।
अभी तक किसी की मौत होने पर उसके परिवार को खतौनी में वरासत दर्ज कराने के लिए तहसील के चक्कर काटने पड़ते थे। मैन्युअल व्यवस्था में कभी-कभी तो तहसील कर्मियों की मिली भगत से फर्जी वरासत भी दर्ज हो जाती थी। किसानों की सुविधा के लिए सरकार ने तहसीलों में ऑनलाइन व्यवस्था लागू कर दी। इसके लिए दो माह पूर्व लखनऊ में राजस्व कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया गया था। तहसील कायमगंज में तैनात राजस्व निरीक्षक सतेंद्र कटियार लखनऊ से ट्रेनिंग कर लौटे तो उन्होंने लेखपालों को प्रशिक्षण दिया। अक्तूबर से ऑनलाइन वरासत शुरू हो गई। जिले में लागू हुई नई व्यवस्था के तहत अब तक फर्रुखाबाद तहसील में 14 ऑनलाइन वरासत दर्ज हुईं। अमृतपुर तहसील में अभी तक खाता भी नहीं खुला है। कायमगंज ने 60 ऑनलाइन वरासत दर्ज हो चुकी हैं और जिले की नंबर एक तहसील बन गई है। इस व्यवस्था के तहत लेखपालों को लैपटॉप नहीं दिए गए थे। तहसील में लगे लैपटॉप पर अन्य कार्य भी होते हैं। इससे लेखपालों को दिक्कत आ रही है। समस्या को देखते हुए लेखपालों को लैपटॉप दिए जाएंगे। फिलहाल इस समस्या को ध्यान में रखते हुए मैन्युअल व्यवस्था चालू है।
ऐसे होती ऑनलाइन है वरासत
कायमगंज। ऑनलाइन वरासत दर्ज कराने के लिए जमीन के गाटा संख्या के आधार पर राजस्व विभाग की साइट (बोर्ड ऑफ रेवेन्यू डॉट यूपी डॉट एनआईसी डॉट इन) पर जन सेवा केंद्र के जरिए आनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इसी आवेदन पर लेखपाल की रिपोर्ट लगेगी। इसके बाद राजस्व निरीक्षक अपनी आख्या लगाएंगे। 15 दिन में तहसीलदार को रिपोर्ट लगानी होगी।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
एसडीएम अनिल कुमार ने बताया जिले में तहसील कायमगंज में सबसे ज्यादा ऑनलाइन व्यवस्था के तहत वरासत दर्ज हुई हैं। लैपटॉप न होने की वजह से लेखपालों को दिक्कत आ रही है। फिलहाल मैन्युअल भी काम किया जा रहा है। जल्द ही लैपटॉप भी मिल जाएंगे। ऑनलाइन व्यवस्था से लोगों को लाभ मिल रहा है।