फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

52 की जगह 48 किलो मिला पैकेट में राशन

विज्ञापन
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। कमालगंज स्थित एफसीआई गोदाम पर डीएसओ ने जांच के नाम पर खानापूरी की। कांटे पर राशन के पैकेट की तौल कराई तो उसका वजन कम मिला। इसके कुछ देर बाद ही वह चले गए। गोदाम पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
विज्ञापन


कमालगंज प्रतिनिधि के अनुसार, राशन की घटतौली की खबर अमर उजाला में 42 लाख राशन हजम कर जाते जिम्मेदार शीर्षक से 25 नवंबर को छपने के बाद मंगलवार को डीएसओ राजेश कुमार कमालगंज-जहानगंज रोड स्थित एफसीआई गोदाम पर जांच करने पहुंचे। कर्मचारियों से उन्होंने पूछताछ की। वहां राशन का एक पैकेट हाथ से सिला हुआ रखा था। उसकी उन्होंने तौल कराई। इस पर उसका वजन 41 किलो ही निकला।

वहीं, गांव भूलनपुर चिरपुरा के कोटेदार झब्बू का राशन लोड हो रहा था। उसमें से एक पैकेट की तौल कराई, तो उसका वजन मात्र 45.800 किलो निकला। जब कि कोटेदार के रिकार्ड में प्रत्येक पैकेट का वजन 52 किलो ही दर्ज किया जा रहा था। गोदाम से एसएमआई नदारद मिले। गोदाम का चौकीदार कौशलेंद्र यादव राशन का उठान करा रहा था। उन्हें कोई अभिलेख नहीं मिले। इस दौरान 10 से 15 मिनट डीएसओ गोदाम रुके और चले गए। डीएसओ रजेश सिंह से इस संदर्भ में बात करने के लिए फोन किया गया। पर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
विज्ञापन


बिना तौल दिया जाता राशन
एफसीआई के गोदाम पर इलेट्रॉनिक कांटा उपलब्ध है। कोटेदार को तौल के बाद राशन देने का प्रावधान है, लेकिन गोदाम प्रभारी किसी भी कोटेदार को तौल के राशन नहीं देते हैं। राशन के पैकेट सीधे ट्रक से कोटेदार के वाहन में लोड करा दिए जाते हैं। यदि कोई कोटेदार इसका विरोध करता है तो अधिकारियों और नेताओं से कहकर उस कोटेदार पर करवाई कराकर उसे प्रताड़ित कराते हैं। इससे कोटेदार मुंह खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। जनपद की सातों गोदामों की एक जैसी स्थिति है। इसके बाद भी प्रशासनिक अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।

माफिया के रेट बढ़ाते ही कम हो जाता पैकेट में राशन
राशन गोदाम से सत्ताधारी नेताओं के साथ ब्लॉक से लेकर मंडल तक गरीबों के निवाले का सौदा किया जाता है। सूत्रों की मानें तो प्रशासनिक कार्रवाई से बचाने के आश्वासन पर मोटी रकम सत्ताधारी नेताओं को भेंट की जाती है। जितनी रकम बढ़ती जाती है उतना ही राशन पैकेटों से कम होता जाता है। उस राशन को बाजार में बेच दिया जाता है। उसी से सभी की जेब गर्म होती है। गरीब अपने निवाले के लिए कोटेदारों से झगड़ा कर शांत होकर बैठ जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें