फर्रुखाबाद। दिवाली आते ही मंडी में खोये की आवक बढ़ गई है। इसका कारोबार करने वालों में कई लोग 15-20 दिन पहले ही मिलावटी खोया बनाने में सक्रिय हो जाते हैं। मिलावटी खोया बनाने वाले को त्योहारों पर अच्छा-खासा मुनाफा हो जाता है। हैरत की बात तो यह है कि मिलावटी खोया आसानी लोग पहचान भी नहीं कर पाते हैं। इससे लोग मिलावटी खोवा घरों में लेकर चले जाते हैं। यह सेहत के लिए बहुत ही घातक होता है।
होली, दिवाली, रक्षाबंधन और अन्य पर्वों में खोया की डिमांड बढ़ जाती है। शहर के त्रिपोलिया चौक पर खोये की मंडी लगती है। आम दिनों की अपेक्षा त्योहार पर चार से पांच गुना आवक ज्यादा होने लगती है। बताते हैं कि कायमगंज, फैजबाग, शमसाबाद, भटासा, अमलैया आशानंद, बछलैया, खुड़नाखार और जहानगंज आदि क्षेत्रों से त्योहारी सीजनों पर यहां के खोया बनाने वाले मिलावट का खेल शुरू कर देते हैं। खाद्य विभाग के तमाम छापेमारी के बावजूद इस पर रोक नहीं लगती है। दिवाली पर सबसे ज्यादा मिठाई बनाई जाती है। इसलिए इस पर्व पर क्विंटलों मिलावटी खोया मंडी में पहुंचता है।
नाम न छापने की शर्त पर मंडी में एक दुकानदार ने बताया कि मिलावटी खोया में दोगुनी इनकम हो जाती है। मौजूदा समय में फुटकर में खोय 160-180 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। दिवाली पर दाम और बढ़ जाएंगे। कारोबारी बताते हैं कि लोगों को भी सस्ता खोया चाहिए होता है। इसलिए मिलावटी खोया मंगवाना मजबूरी होता है। असली खोया 200 से 230 रुपये प्रति किलो पड़ता है। एक दवा आती है, मिलावटी खोया में लगाने पर वह काला पड़ जाता है। जिला अभिहित अधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि खोया मंडी में छापेमारी की जाएगी। मिलावटी खोया में डाले जाने वाले पदार्थ ग्लूकोज पाउडर, रिफाइंड, बूरा, मिल्क पाउडर और केमिकल आदि हैं।
-160 से 180 रुपये प्रति किलो बिक रहा मिलावटी खोया
-कायमगंज तहसील क्षेत्र के कई गांवों से आता बाजार में
अमर उजाला ब्यूरो