कमालगंज (फर्रुखाबाद)। रावण वध के बाद भगवान राम की विजय यात्रा के जश्न के अगले दिन राम-भरत मिलाप हुआ। कार्यक्रम देख दर्शकों की आंखें भर आईं। जिलाधिकारी मोनिका रानी और पुलिस अधीक्षक संतोष मिश्र ने कमाल शाह बाबा की मजार पर चादर चढ़ाई और भगवान राम की आरती उतारी।
हिंदूृ-मुस्लिम एकता का प्रतीक बना भरत मिलाप कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। सोमवार देर रात राम-भरत मिलाप लीला का मंचन श्री रामलीला कमेटी की तरफ से किया गया। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने थाना परिसर में ब्रह्म देव की पूजा अर्चना की। इसके बाद थाने के बाहर कमालशाह बाबा की मजार पर चादर चढ़ाई और फिर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और अंगद की आरती उतारी। एक तरफ थाने के गेट पर उर्स कमेटी की तरफ से कव्वाली तो चौराहे पर रामलीला कमेटी की तरफ से भरत मिलाप का कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कमेटी ने भगवान राम की आरती उतारी। रामलीला कमेटी के संरक्षक सतीशचंद्र दुबे, अध्यक्ष रवि दुबे, संतोष दुबे, राजेंद्र बाबू गुप्ता, शिवकुमार हलवाई, गौरव गुप्ता, रामआसरे दीक्षित, प्रभाशंकर, रमेश विश्नोई, इस्लाम, वारिश पठान और ज्याउद्दीन आदि मौजूद रहे।
अफसरों ने नहीं पहनी पगड़ी
कमालगंज। हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक भरत-मिलाप कार्यक्रम में कमाल शाह बाबा की मजार पर चादर चढ़ाने से पहले कमेटी की तरफ से पगड़ी पहनाने की रस्म की जाती है। कमेटी के पदाधिकारियों ने डीएम मोनिका रानी को फूल भेंट किए। पदाधिकारी एसपी को पगड़ी पहनाने पहुंचे तो उन्होंने माला और पगड़ी बांधने वाला कपड़ा ही गले में डालकर सम्मान कराया। एसपी के पगड़ी न बंधवाने पर किसी भी प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी ने पगड़ी नहीं बंधवाई। पगड़ी न बंधवाना पूरे बाजार में चर्चा का विषय बना रहा। पिछले साल भी भोजपुर विधायक नागेंद्र सिंह राठौर ने भी पगड़ी पहनने से इनकार कर दिया था। उर्स कमेटी के पदाधिकारी इस्लाम ने बताया कि उर्स का कार्यक्रम कई वर्षों से चल रहा है। इस बार प्रशासन के अफसरों ने पगड़ी पहनने से परहेज किया। यह पहली बार हुआ है।)