अमर उजाला ब्यूरो
अमृतपुर(फर्रुखाबाद )। रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से अलादपुर के ग्रामीण पलायन कर बंधा पर पहुंच गए हैं। यह यहीं पॉलिथीन तानकर परिवार के साथ रहे हैं। ब्लाक के कर्मचारियों की लापरवाही से शरणालय में ग्रामीणों को एक समय ही भोजन मिल रहा है। इससे बाढ़ पीड़ित दुखी हैं। वहीं डीएम के आदेश के 10 दिन बाद भी लेखपाल ने जमीन की पैमाइश नहीं की है।
तहसील क्षेत्र का अलादपुर भटौली गांव रामगंगा के किनारे बसा है। रामगंगा की बाढ़ से मकान कट गए हैं। इससे बेघर हुए लोग बंधा पर पॉलिथीन तानक र रह रहे हैं। जिलाधिकारी के आदेश पर उपजिलाधिकारी ने बाढ़ पीड़िताें के रहने के लिए लभेड़ा में जगह देने का प्रस्ताव बनाया था। 22 अगस्त को जिलाधिकारी के हाथों से 17 लोगों को पट्टा स्वीकृति के प्रमाणपत्र बंटवाए गए। 10 दिन बीतने के बाद भी तहसीलदार व लेखपाल ने पट्टे के लिए आवंटित भूमि की पैमाइश नहीं की है। मकान कटने के बाद यह रामगंगा के किनारे खेतों में झोपड़ी डाल कर रहने लगे थे।
रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से इनकी झोपड़ियों में पानी भर गया। इससे अब यह कड़क्का बांध पर पॉलिथीन तानकर रहने को मजबूर हैं। जिलाधिकारी के आदेश पर अलादपुर भटौली के पूर्व माध्यमिक विद्यालय को बाढ़ शरणालय बनाया गया है। इसमें बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन व रहने की व्यवस्था की गई है। भोजन की व्यवस्था खंड विकास अधिकारी को दी गई है। कुछ दिन तक ग्रामीणों को दोनों समय भोजन मिलता रहा। बाद में अधिकारियों ने मुंह मोड़ लिया। यहां कई दिनों से एक समय ही भोजन बन रहा है। वह भी सभी को भरपेट नहीं मिलता है।
शरणालय में एक वक्त ही मिल रहा भोजन
- दस दिन बाद भी नहीं हो सकी भूमि की पैमाइश
- झोपड़ी डाल कर बंधा पर रहने को मजबूर हैं ग्रामीण