अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। प्रदेश में हाथ से मैला ढोने वालों के पुनर्वास के लिए सरकार प्रयास कर रही है। हाथ से मैला ढोने वाले लोगों को चिह्नित करने के लिए जिला समाज कल्याण विभाग ने ब्लाक व ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर लगाए थे। इनमें कुछ ऐसे लोगों ने भी आवेदन कर दिए, जिनके परिवार के लोग सरकारी नौकरी में हैं। वह योजना का लाभ लेने के लिए लाइन में लग गए। एक महिला ने खुद को मैला ढोने वाली बताया, जबकि उसके ससुर फौज में हैं।
जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश बघेल ने बताया कि राजेपुर ब्लाक के एक गांव से महिला ने आवेदन कर बताया कि वह हाथ से मैला ढोने का काम करती है। जब इस मामले का सत्यापन कराया गया तो पता चला कि उसके ससुर आर्मी में नौकरी करते हैं। पति भी ठीक काम करता है। महिला ने केवल 40 हजार रुपये के लालच में आवेदन कर दिया था। उन्होंने बताया कि गांवों में यह अफवाह उड़ा दी गई थी कि जो लोग 2013 तक हाथ से मैला ढोते थे, उन्हें सरकार 40 हजार रुपये देगी। इससे बहुत से अपत्र लोगों ने आवेदन कर दिए थे। उन्होंने बताया कि लोग फर्जी फोटो लगाकर आवेदन कर रहे हैं।
2252 लोगों ने जनपद में किया था आवेदन
जिले में मार्च व अप्रैल में शिविर लगाकर हाथ से मैला ढोने वालों के आवेदन लिए गए थे। इस दौरान सभी सात ब्लॉक से 2252 आवेदन आए थे। इसके बाद सत्यापन कराने पर 1131 व दोबारा सत्यापन में महज 322 लोग ही पात्र बचे। हालांकि अभी सत्यापन पूरा नहीं हुआ है। इससे यह आंकड़ा अभी कुछ ऊपर नीचे हो सकता है। जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश बघेल ने बताया कि यदि किसी परिवार में कोई एक सदस्य भी किसी समय में हाथ से मैला ढोने का काम करता था तो उस परिवार के सभी सदस्यों ने आवेदन कर दिया है।
यह मिल सकता है लाभ
केंद्र सरकार हाथ से मैला उठाने वालों को पुनर्वास अधिनियम-2013 के तहत दूसरे रोजगार प्रदान करेगी। साथ ही अपना काम करने के इच्छुक लोगों को बैंकों से ऋण भी दिलाएगी।