अमर उजाला ब्यूरो
अमृतपुर (फर्रुखाबाद)। तहसील क्षेत्र के गांव अलादपुर भटौली के ग्रामीण बाढ़ की आशंका से भयभीत हैं। उन्होंने अपने मकानों को तोड़ना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि बाढ़ आने पर हर साल कटान होती है। ऐसे में नदी किनारे पड़ने वाले उनके मकान कटान के चलते ध्वस्त हो जाते हैं। इसलिए अब वे खुद ही मकान तोड़कर उनकी ईंटें बचाना चाहते हैं ताकि दोबारा मकान बनाएं तो कम से कम उन्हें ईंटों की व्यवस्था तो न करनी पड़े। वहीं, गांव का जायजा लेने पहुंचे उप जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से बातचीत वस्तुस्थिति को परखा।
पिछले कुछ दिनों से गंगा का जलस्तर बढ़ने से अलादपुर भटौली के ग्रामीण परेशान हैं। रविवार को गांव के कल्लू, मनोज कुमार, सुनील कुमार, सुधीर कुमार, दीपू, दयाराम, पूरन लाल और शिवमंगल ने अपने-अपने मकानों को तोड़ना शुरू कर दिया। मौके पर पहुंचे उप जिलाधिकारी रमेशचंद्र यादव ने ग्रामीणों से बातचीत की। इस दौरान ग्रामीणों ने मांग की कि उन लोगों को रहने के लिए जगह उपलब्ध कराई जाए। एसडीएम ने कहा कि ग्राम समाज की भूमि नहीं है। इससे रहने के लिए जगह नहीं दे सकते।
एसडीएम ने बताया कि अलादपुर भटौली के 19 ग्रामीणों की सूची प्रधानमंत्री आवास के लिए जिलाधिकारी के पास भेजी गई है। इसके बाद एसडीएम ने शीश राम की मड़ैया और कोला सोता का निरीक्षण किया। एसडीएम ने बताया कि शीशराम मड़ैया के ग्रामीणों को रहने के लिए चाचूपुर में जगह दी जा रही है लेकिन वे वहां रहने को तैयार नहीं हैं। बताया कि रामगंगा का जलस्तर कम है। बाढ़ की अभी कोई आशंका नहीं है।