अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। कंपिल में जब सूत कताई मिल बन रही थी, तब किसानों ने नौकरी के लालच में अपनी जमीन दे दी थी। मिल चालू होने पर किसानों को नौकरी मिलने से चेहरे खिल गए। मिल बंद होने से किसानों की जमीन तो गई ही, साथ ही नौकरी भी चली गई। अब किसान वीआरएस के रुपयों के इंतजार में हैं।
कंपिल कताई मिल बंद होने से बेरोजगार हुए तकरीबन 1500 श्रमिकों में से 12 ऐसे हैं जिन्होंने नौकरी के लालच में सहकारी कताई मिल को अपनी जमीन औने पौने दामों में दे दी थी। कुछ ही सालों में मिल बंद होने से किसानों की जमीन और नौकरी दोनों ही चली गईं। जीपीएफ का पैसा भी अधिकारी डकार गए।
कुंवरपुर निवासी विनोद शुक्ला बताते हैं कि उनकी 38 बीघा जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसकी कीमत उन्हें 1000 रुपये बीघा के हिसाब से दी गई थी। इसी तरह गांव शिवपुर निवासी दामोदर की 20 बीघा जमीन का अधिग्रहण किया गया था। मुआवजे के नाम पर 900 रुपये प्रति बीघा की दर से रुपये दिए गए थे। विनोद दुबे सहित लगभग 30 किसानों की जमीन मिल के लिए अधिग्रहीत की गई थी। विनोद शुक्ला ने बताया कि हम लोगों को अब मिल चलने की उम्मीद तो नहीं रही लेकिन हमारा रुपया तो मिल जाए।
18 को ही मिली थी नौकरी
मिल निर्माण के समय कंपिल, शिवपुर, कुंवरपुर, सिकंदरपुर, हमीरपुर काजी आदि गांवों के करीब 30 किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इनमें से महज 18 को ही नौकरी दी गई थी अन्य लोगों को औने पौने दाम देकर निपटा दिया गया था।